बारिश के इंतजार में हर कोई व्याकुल
https://www.shirazehind.com/2017/06/blog-post_367.html
जौनपुर। मौसम की बेरुखी अब लोगों के आम जीवन पर भारी पड़ने लगी है। बारिश के इंतजार में हर कोई व्याकुल है। ऐसे में आसमान में बादल लोगों को ललचा कर चले जा रहे हैं। जनपद में गुरूवार को पूरे दिन कभी धूप तो कभी छांव का खेल चलता रहा। धूप होती तो इतनी तेज की आंख भी नहीं ठहर पा रही थी। वहीं छांव होने पर लोगों को थोड़ी राहत मिल जा रही थी।
इधर एक सप्ताह से पड़ रही भीषण गर्मी से लोग पहले से ही बेहाल हैं। अमूमन 15 जून तक मानसून आने का समय है। नियति तिथि पर मानसून नहीं आने से तापमान का पारा चढ़ता जा रहा है। सुबह तगड़ी धूप के साथ पुरवा हवा ने उमस को बढ़ा दिया। दिन चढ़ने के साथ ही पारा बढ़ता गया। बीच-बीच में बदली आ जाने से लोगों को थोड़ी राहत मिल जा रही थी। इसमें सबसे अधिक दिक्कत मजदूर वर्ग के लोगों को हुई। वे समझ नहीं पा रही कि आखिर करें तो क्या करें। उसम से लोगों को न तो अंदर ही चैन था न ही बाहर। पेड़ों की छांव के नीचे लोगों को आराम मिल रहा था। किसान बादलों को देखकर वर्षा होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पेड़ के नीचे काफी राहत मिल रही थी। पशु पक्षी भी पानी के लिए भटकते रहे। वहीं गर्मी से अधिक परेशानी घर के अंदर महिलाओं व बच्चों को हुई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि मानसून कब तक दस्तक देगा।
इधर एक सप्ताह से पड़ रही भीषण गर्मी से लोग पहले से ही बेहाल हैं। अमूमन 15 जून तक मानसून आने का समय है। नियति तिथि पर मानसून नहीं आने से तापमान का पारा चढ़ता जा रहा है। सुबह तगड़ी धूप के साथ पुरवा हवा ने उमस को बढ़ा दिया। दिन चढ़ने के साथ ही पारा बढ़ता गया। बीच-बीच में बदली आ जाने से लोगों को थोड़ी राहत मिल जा रही थी। इसमें सबसे अधिक दिक्कत मजदूर वर्ग के लोगों को हुई। वे समझ नहीं पा रही कि आखिर करें तो क्या करें। उसम से लोगों को न तो अंदर ही चैन था न ही बाहर। पेड़ों की छांव के नीचे लोगों को आराम मिल रहा था। किसान बादलों को देखकर वर्षा होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पेड़ के नीचे काफी राहत मिल रही थी। पशु पक्षी भी पानी के लिए भटकते रहे। वहीं गर्मी से अधिक परेशानी घर के अंदर महिलाओं व बच्चों को हुई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि मानसून कब तक दस्तक देगा।

