किसानों के फसली ऋण माफ होने में लग सकता है पांच माह
https://www.shirazehind.com/2017/06/blog-post_696.html
जौनपुर। योगी सरकार ने किसानों के फसली ऋण माफ करने का एलान करके वाहवाही तो लूट ली मगर इसका लाभ किसानों का हाल-फिलहाल मिलता नहीं दिख रहा है। अभी तो यही तय नहीं है कि शासन ऋण माफी की सीमा क्या रखेगा। फिलहाल इसके लिए बैंकों से किसानों के लिए गए ऋण का रिकार्ड मांगा गया है। अभी यह तय नहीं है कि सभी किसानों के फसली ऋण माफ ही हो जाएंगे। सरकार पहले रिकार्ड का अध्ययन करेगी और माफी लायक किसानों की सूची बनाकर आदेश जारी करेगी। यह पूरी प्रक्रिया रबी सीजन के शुरू होने तक का समय ले सकती है। जिले के एक लाख 15 हजार 818 किसानों ने फसली ऋण लिया है। इस समय बैकों का किसानों पर 577 करोड़ फसली ऋण बकाया है। 31 मार्च 2016 तक जिले के 80 हजार किसानों का 400 करोड़ रूपया पूरी प्रक्रिया होने के बाद माफ होगा।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव में किसानों के ऋण माफ करने की घोषणा की थी। अपने चुनावी घोषणा पत्र का वादा पूरे करते हुए योगी सरकार ने इसका एलान भी कर दिया, लेकिन इसके दो माह बाद भी अभी तक इसका आदेश बैंकों को नहीं मिला है। अभी तो बैंकों से कर्जदार किसानों का रिकार्ड ही मांगा जा रहा है। बैंक अपने कर्जदार किसानों की सूची बनाकर रीजनल आफिसों को भेज रहे हैं। सभी बैंकों को 31 मई तक जानकारी देनी थी, लेकिन अभी भी तमाम बैंक रिकार्ड देने में पीछे रह गए हैं। बताया गया है कि रिकार्ड मिलने के बाद शासन इसका अध्ययन करेगा और इसके बाद किन किसानों को ऋण माफी दी जानी है। दरअसल बैंकों से जो जानकारी मांगी गयी है, उसके अनुसार 31 मार्च से पहले के फसली ऋण शामिल किए गए हैं। यह भी पूछा गया है कि कितने किसानों ने कुल कितना ऋण लिया है और इसकी अवधि क्या रही है। इसी के साथ यह भी पूछा गया है कि ऋण के एवज में 31 मार्च से पहले कर्जदार किसानों ने कितनी किश्तें अदा की हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह लंबी प्रक्रिया है। पूरे प्रदेश के आंकड़े मिलने के बाद शासन इनका अध्ययन करेगा और एक मानक तय होने के बाद किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा और उसके बाद बैंकों के लिए आदेश पत्र जारी होंगे। उनकी मानें तो यह प्रक्रिया पूरी होने में चार-पांच महीने का समय भी लग सकता है।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव में किसानों के ऋण माफ करने की घोषणा की थी। अपने चुनावी घोषणा पत्र का वादा पूरे करते हुए योगी सरकार ने इसका एलान भी कर दिया, लेकिन इसके दो माह बाद भी अभी तक इसका आदेश बैंकों को नहीं मिला है। अभी तो बैंकों से कर्जदार किसानों का रिकार्ड ही मांगा जा रहा है। बैंक अपने कर्जदार किसानों की सूची बनाकर रीजनल आफिसों को भेज रहे हैं। सभी बैंकों को 31 मई तक जानकारी देनी थी, लेकिन अभी भी तमाम बैंक रिकार्ड देने में पीछे रह गए हैं। बताया गया है कि रिकार्ड मिलने के बाद शासन इसका अध्ययन करेगा और इसके बाद किन किसानों को ऋण माफी दी जानी है। दरअसल बैंकों से जो जानकारी मांगी गयी है, उसके अनुसार 31 मार्च से पहले के फसली ऋण शामिल किए गए हैं। यह भी पूछा गया है कि कितने किसानों ने कुल कितना ऋण लिया है और इसकी अवधि क्या रही है। इसी के साथ यह भी पूछा गया है कि ऋण के एवज में 31 मार्च से पहले कर्जदार किसानों ने कितनी किश्तें अदा की हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह लंबी प्रक्रिया है। पूरे प्रदेश के आंकड़े मिलने के बाद शासन इनका अध्ययन करेगा और एक मानक तय होने के बाद किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा और उसके बाद बैंकों के लिए आदेश पत्र जारी होंगे। उनकी मानें तो यह प्रक्रिया पूरी होने में चार-पांच महीने का समय भी लग सकता है।

