नगर पालिका के आस पास भी अतिक्रमण का दंश
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जौनपुर। नगरपालिका में दिया तले अंधेरा वाली कहावत सौ फीसदी चरितार्थ हो रही है। शहर को अतिक्रमण से मुक्त कराने का जिम्मा संभालने वाली नगरपालिका के आँगन व आस पास में ही अतिक्रमण की खेल खूब फल-फूल रही है। कोई कुल्फी बेच रहा है, तो कोई चाय। कोई चाट का ठोल लगाये हुये है। हैरानी की बात तो यह है कि शासन की मंशा के खिलाफ किये गये अतिक्रमण को नगरपालिका प्रशासन रोज ही देख रहे है। बावजूद इसके कार्यवाही करने का साहस नहीं जुटा पा रहे। इसमें कहीं न कहीं साँठगाँठ की बू आती है। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि पूरा प्रदेश अतिक्रमणमुक्त हो और लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्रदान की जाये। एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री की मंशा है कि प्रदेश अतिक्रमणमुक्त हो लेकिन बात करे नगरपालिका की तो यहाँ मुख्यमंत्री की मंशा को दरकिनार दिया जाता है। न तो नगरपालिका अध्यक्ष को मुख्यमंत्री के सपने को पूरा करने की फिक्र है और न ही अधिशासी अधिकारी को सीएम का का खौफ है। यही वजह है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने की जिम्मेदारी संभालने वाली नगरपालिका का कार्यालय के आस पास अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो सका। नगरपालिका परिसर में शाम होते-होते पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती। अतिक्रमण से लोगों को होने वाली परेशानियों का ध्यान भी रखा जाना चाहिये। शहर भर को अतिक्रमण से मुक्त कराने वाली नगरपालिका अपने आँगन को ही अतिक्रमण से मुक्त नहीं करा सकती।

