गोरखपुर में 64 बच्चों की मौत राज्य प्रायोजित जनसंहार हैः माले
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मिर्जापुर। भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) के कार्यकर्ताआंे ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में 64 बच्चों की मौत पर आक्रोश जताकर भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय कमेटी के सदस्य मो0 सलीम ने कहा कि बड़े शर्म की बात है जब हम भारत के आजादी के 70 सालों का जश्न मनाने की बात कर रहे है। तब देश के सरकारी अस्पताल गरीबों के बच्चों के लिए मौत का कुआं बने हुए है। इन मौतो को महज प्रशासनिक लापरवाही कहना ठीक नहीं है बल्कि यह राज्य का प्रायोजित जनसंहार है। उन्होने कहा आक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी को महज 70 लाख रूपये भुगतान न करने का नतीजा है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो गोरखपुर से पांच बार संासद है। पूरी तरह वह बच्चों के मौत के जिम्मेदार है। उन्हें अपने आपराधिक जवाबदेही स्वीकार करते हुए अविलम्ब इस्तीफा दे देना चाहिए।
गोरखपुर के सरकारी अस्पतालों मंे जापानी इन्सेफलाइटिस से पीड़ित और अपनी जान गवां रहे बच्चों के हालत के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन योगी आदित्यनाथ यह जानने मंे व्यस्त है। मदरसों में बच्चे वंदे मातरम गा रहे है या नहीं। इससे पता चल रहा है कि भाजपा की सरकारों के लिए प्राथमिकता बच्चों का स्वास्थ्य व जीवन नहीं, बल्कि केवल साम्प्रदायिकता और उन्माद-उत्पाद की राजनीति करना है। उन्होने कहा कि योगी प्रशासन का पूरा जोर उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो को डराने में है। जाहिर है ऐसे में जरूरी नागरिक सेवाएं सरकार के लिए कोई विषय ही नहीं है। इस अस्पताल का स्टाफ का वेतन और आवश्यक उपकरण के लिए फण्ड न जारी करने के लिए केन्द्र सरकार भी जिम्मेदार है।
प्रदर्शन में आशाराम भारती, राजाराम यादव, कृष्णानन्द निषाद, अशेाक निषाद, इकबाल वारसी, मेराज अहमद, चांद बाबू, नीरज वर्मा, साहेब अंसारी, जितेन्द्र, रंजन, अर्जुन, परानू आदि शामिल थे।
गोरखपुर के सरकारी अस्पतालों मंे जापानी इन्सेफलाइटिस से पीड़ित और अपनी जान गवां रहे बच्चों के हालत के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन योगी आदित्यनाथ यह जानने मंे व्यस्त है। मदरसों में बच्चे वंदे मातरम गा रहे है या नहीं। इससे पता चल रहा है कि भाजपा की सरकारों के लिए प्राथमिकता बच्चों का स्वास्थ्य व जीवन नहीं, बल्कि केवल साम्प्रदायिकता और उन्माद-उत्पाद की राजनीति करना है। उन्होने कहा कि योगी प्रशासन का पूरा जोर उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो को डराने में है। जाहिर है ऐसे में जरूरी नागरिक सेवाएं सरकार के लिए कोई विषय ही नहीं है। इस अस्पताल का स्टाफ का वेतन और आवश्यक उपकरण के लिए फण्ड न जारी करने के लिए केन्द्र सरकार भी जिम्मेदार है।
प्रदर्शन में आशाराम भारती, राजाराम यादव, कृष्णानन्द निषाद, अशेाक निषाद, इकबाल वारसी, मेराज अहमद, चांद बाबू, नीरज वर्मा, साहेब अंसारी, जितेन्द्र, रंजन, अर्जुन, परानू आदि शामिल थे।

