मच्छरों के आतंक से आम लोग परेशान
https://www.shirazehind.com/2017/08/blog-post_254.html
जौनपुर। जिले में बरसात के मौसम में संक्रामक व मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोगों को जागरूक करने स्वास्थ्य संबंधी सरकार की योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने के लिए आशा, एएनएम की तैनाती की गई है। जिससे स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाया जाता है। बरसात के मध्य सीजन में भी कीटनाशी रसायन का छिड़काव नही हो पाया। बारिश का पानी एकत्रित होने से मच्छरों का लार्वा पनप रहा है। इनको नष्ट करने के लिए छिड़काव आवश्यक है। अभी तक इसकी रोकथाम के लिए धरातल पर कोई पहल नहीं की गई। पेयजलस्त्रोतों को विसंक्रमित नहीं किया जा रहा है। जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। शाम होते ही मच्छरों का आतंक बढ जाता है। गांवों की बात दर किनार शहर में फागिग नहीं करायी जा रही है। न ही कीटनाशकों का छिड़काव कराया गया है। अस्पातलों में मच्छर से पैदा होने वाली बीमारियों की तादात बढती जा रही है। जिले भर में बारिश के पानी के जलजमाव से पैदा हो रहे मच्छरों से अनेक प्रकार की बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। इसके रोकथाम का सरकारी स्तर पर विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है। समय के साथ मच्छर भी शक्तिशाली होते जा रहे हैं। उन पर नीम की पत्ती, कंडे का असर तो दूर फागिग रसायनों का छिड़काव, काइल, मैट्स, मास्क्यूटो लिक्विडेटर भी बेअसर हो गए हैं। बीते 10 से 15 साल में उन्होंने जनसंख्या के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा लिया है। उसका नकारात्मक असर यह सामने आ रहा है कि 12 से 16 दिन में पानी में पनपने वाले लार्वा अब हफ्ते भर में पैदा होने लगे हैं। साफ और दूषित जल दोनों ही मच्छरों के घर हो गए हैं। रात की तरह दिन में मच्छर डंक चुभा रहे हैं। घर, कार्यालय, संस्थानों में मच्छरों की फौज रहती है। मच्छरों का जीवन चक्र पूरा करने के लिए पानी का होना जरूरी है। पानी में ही मच्छर पनपते हैं और लोगों को अपना शिकार बनाते हैं सभी मच्छरों के जीवन चक्र में चार अवस्थाएं रहती हैं। यह पानी के अंदर ही होती हैं। अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क मच्छर शामिल हैं। मादा मच्छर ज्यादा खतरनाक होती है। मादा मच्छर मनुष्य व जानवर का खून चुसती है। जबकि नर मच्छर पौधों का रस चूसते हैं। मलेरिया परजीवी एक प्राथमिक पोषक मादा एनाफिलीज मच्छर होती है। यह रात में ही डंक चुभाती है।

