बच्चों में भारतीय संस्कृति के रसपान का सबसे सुंदर अवसर है " श्री कृष्ण जन्मआष्ट्मी "
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जौनपुर। नैतिकता के बीजों का अंकुरण संस्कारों के भूमि पर
अध्यत्मिक्ता के उर्वरक से ही सम्भव है। बच्चों में भारतीय संस्कृति के
रसपान का सबसे सुंदर अवसर यदि कोई है तो वह है " श्री कृष्ण जन्मआष्ट्मी
"।
प्राथमिक विद्यालय जहुरुद्दीनपुर,कृष्ण ने अपने
जीवन में जो कुछ भी किया, वह कितने जोश और जुनून के साथ किया। चाहे एक बालक
के रूप में देखें या एक युवा या एक योद्धा के रूप में देखें, एक
राजनीतिज्ञ के रूप में देखें या एक शिक्षक या एक दिव्य अवतार के रूप में
देखें, उनके जीवन की किसी भी स्थिति में, सुस्ती का एक पल भी नहीं था। वह
हर समय पूरे जोर-शोर से सक्रिय रहते थे। जो लोग चाहे किसी भी वजह से, हर
समय खुद को सक्रिय रखने में सफल हो पाते हैं, निश्चित तौर पर एक बड़ी
संभावना में विकसित होते हैं। चाहे हम अपना ध्यान जागरूकता पर केंद्रित
करें, या भक्ति, क्रिया या अपनी ऊर्जा पर, आखिरकार हम यही देखते हैं कि वह
जीवन, जो आप हैं, उसे हर समय सक्रिय और जीवंत कैसे रखें। अगर यह हर समय
सक्रिय रहेगा, तो यह आपको परम प्रकृति तक ले जाएगा। सुइथाकलां, जौनपुर के
छात्रों ने धूमधाम से मनाया लल्ला का जन्मदिन।
हर
बालक में जो रूप नज़र आता है वो मेरे कान्हा का है। नटखट बालपन का एक आभूषण
है जिसके बिना बालपन सुना है। आज के आधुनिकता में बच्चों का यही बालपन तो
खो गया है, किताबों के बोझ तले सिसकता इनका नटखटपन। इसी नटखट पलों को बच्चों के बीच हम सबने जीया। लड्डू गोपाल की झांकी सजाई गयी।
राधाकृष्ण का सुंदर जोड़ा तैयार किया गया।दशावतार को चित्र के माध्यम से भारत के अध्यात्म में भी विज्ञान के दर्शन कराये गए। माखन चोर की मटकी फोड़ प्रतियोगिता।
विद्यालय
के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार अग्रहरि ने बताया की कृष्ण ने गीता
सार में कहा है की "व्यक्ति जो चाहे बन सकता है यदी वह विश्वास के साथ
इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे।"
शिक्षक
सिंह शिवम् ने बच्चों को बताया की श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में जो कुछ भी
किया, वह कितने जोश और जुनून के साथ किया। चाहे एक बालक के रूप में देखें
या एक युवा या एक योद्धा के रूप में देखें, एक राजनीतिज्ञ के रूप में देखें
या एक शिक्षक या एक दिव्य अवतार के रूप में देखें, उनके जीवन की किसी भी
स्थिति में, सुस्ती का एक पल भी नहीं था। वह हर समय पूरे जोर-शोर से सक्रिय
रहते थे। जो लोग चाहे किसी भी वजह से, हर समय खुद को सक्रिय रखने में सफल
हो पाते हैं, निश्चित तौर पर एक बड़ी संभावना में विकसित होते हैं। चाहे हम
अपना ध्यान जागरूकता पर केंद्रित करें, या भक्ति, क्रिया या अपनी ऊर्जा
पर, आखिरकार हम यही देखते हैं कि वह जीवन, जो आप हैं, उसे हर समय सक्रिय और
जीवंत कैसे रखें। अगर यह हर समय सक्रिय रहेगा, तो यह आपको परम प्रकृति तक
ले जाएगा।

