कयामत तक मनाते रहेंगे इमाम हुसैन का गम : मौलाना सै.अली हैदर आब्दी
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जौनपुर। कर्बला के
शहीद हजरत इमाम हुसैन और 71 साथियों की याद में सातवीं मोहर्रम को जिले में
कई स्थानों पर मातमी जुलूस निकाला गया। जिसमें अंजुमनों ने दर्द भरे नौहें
पढ़ने के साथ-साथ जंजीर और छुरियों का मातम कर नजराने अकीदत पेश किया।
मोहर्रम के पहले गुरुवार को शाह का पंजा बाबूपुर में सुबह से ही बड़ी संख्या
में अजादारों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हुआ। यहां मुगल काल से ही यह
परम्परा चली आ रही है कि मोहर्रम की पहली नौचंदी में लोग दूर-दूर से आकर
खिचड़ी बनाते है। साथ ही मलीदा व जर्दा बनाकर मौला हजरत अली अ.स. के रौजे पर
नज्र कराते है। यहां तेलावते कलामे पाक व नौकाख्वानी के बाद जुलूसों का
सिलसिला आना शुरु हुआ जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। मन्नती
जुलूस अलम, बलुआघाट, सिपाह, पोस्तीखाना, पुरानी बाजार से पहुंचा। शाह के
पंजे के संयोजक तहसीन शाहिद की निगरानी में यहां बड़े पैमाने पर रौजे का
निर्माण कार्य भी जारी है। यहां अजादारों के लिए चाय पानी के साथ-साथ अन्य
प्रसाद लोगों को बांटा गया। इस मौके पर मोतवल्ली बोर्ड के सदस्य मिर्जा
मोहम्मद बाकर, शहजादे, मुन्ना अकेला, अच्छन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
संचालन मेंहदी रजा एडवोकेट तथा आभार मुतवल्ली तहसीन शाहिद ने किया।
इसी
क्रम में नगर के बलुआघाट स्थित हाजी मोहम्मद अली खां के इमामबाड़े में
सातवीं मोहर्रम के ऐतिहासिक जुलूस की मजलिस सहारनपुर से आये मौलाना सै.अली
हैदर आब्दी ने पढ़ते हुए कहा कि कर्बला को शायद ही कोई भुला सकता है जिस
तरह से हजरत अली और उनके बेटों ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना भरा घर लूटा
दिया वो कयामत तक लोग याद रखते रहेंगे। कर्बला में इमाम हुसैन ने अपने
छोटे बच्चों को भी राहे हक पर कुर्बान कर दिया। यही वजह है कि आज पूरी
दुनिया में उनका गम मनाया जा रहा है। इसमें सभी सम्प्रदाय के लोग शामिल
होते है। हम सब उनके बताये हुए रास्ते पर चले तो इस दुनिया से आतंकवाद पूरी
तरह से समाप्त हो सकता है। कर्बला में उस वक्त सबसे बड़ा आतंकवाद यजीद का
था जिसने अपनी सारी हदें पार करते हुए हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.) के
नवासों को तीन दिन का भूखा प्यासा, शहीद कर दिया था। आज उन्हीं की याद में
हम लोग मजलिस मातम और नौहा पढ़कर उनको नजराने अकीदत पेश कर रहे है। मजलिस
के बाद शबीहे ताबूत अलम और जुलजनाह निकाला गया। जिसमें अंजुमन हुसैनिया
नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए जुलूस को नवरोज के मैदान तक ले गयी जहां एक
तकरीर को खेताब करते हुए गुलामुल सकलैन ने कहा कि कर्बला की याद में आज
छोटे-छोटे बच्चे हाथों में अलम लेकर इस्लाम का परचम ऊंचा कर रहे है वहीं
घरों के अंदर अजाखानें सजे है और दिन रात नौहा मातम कर सभी अजादार इमाम
हुसैन का गम मनाने में डूबे है। तकरीर के बाद इमामबाड़े से शबीहे तुर्बत और
झुला अली असगर निकाला गया जिसे अलम, ताबूत और दुलदुल से मिलाया गया। जुलूस
पुनरू हाजी मोहम्मद अली के इमामबाड़े में जाकर समाप्त हुआ।
इसी
क्रम में करंजाकला ब्लाक के करंजाखुर्द में सातवीं मोहर्रम का जुलूस दरोगा
जी के इमामबारगाह में मजलिस हुई। मजलिस में नवाज हैदर व उनके हमनवां ने
सोजख्वानी की, सैय्यद मोहम्मद शोजफ आब्दी ने जनाबे हजरत कासिम (अ.स.) की
मुनासबत से अपनी तकरीर किया। जिसके बाद शबीहे अलम निकाला गया और पूरे गांव
में गश्त किया। गश्त करते हुए गांव के इमामबारगाह के मैदान में अंगारे का
मातम किया। जुलूस में सुल्तान हैदर, आजम जैदी, असलम जैदी, सलमान हैदर, हसीन
भाई, वसी हैदर, मिसम हैदर, फैजान हैदर, तशशन भाई, शिराज हैदर जैदी, इमरान
जैदी,शानू गांधी, आजम आब्दी, विनोद यादव, पंकज और गांव दूर से आये हुए
मोमनीन मौजूद रहे।

