अपनों ने ही लूट लिया विधवा महिला को
https://www.shirazehind.com/2018/02/blog-post_484.html
जौनपुर। यह घटनाक्रम करीबी रिश्तों पर कलंक सरीखा है। जिन सगे
संबंधियों ने देख-रेख की जिम्मेदारी ली, उन्हीं लोगों ने विधवा को बंधक
बनाकर जबरन उसके खाते से 33 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए और 15 लाख के गहने
हड़प लिए। यह काली करतूत सगी बहन और बहनोई ने की। पति की मौत के बाद दोनो
साजिश करते हुए उसका ख्याल रखने के बहाने अपने साथ घर ले आए थे। पति के फंड
में मिले रुपयों को फिक्स करने का धोखा देकर उसे अपने खाते में डलवा लिया।
करीब 6 माह बाद भतीजा हालचाल लेने पहुंचा तो मामला खुल गया। शिकायत पर
पुलिस ने उसे मुक्त करा लिया।
चंदवक थाना क्षेत्र के मढ़ी गांव निवासी प्रभा देवी के पति रामजीत का एक वर्ष पूर्व निधन हो गया था। वे एनएफएल में अभियंता थे। उन्हें कोई संतान नहीं थी। पति की मौत के बाद तेरहवीं में पहुंची विधवा की बहन धर्मावती देवी, बहनोई रामकेर और बेटा र¨वद्र ख्याल रखने का झांसा देकर अपने घर तरियारी ले आए। यहां के यूनियन बैंक की शाखा में उनका खाता खोलवाया गया। इसी में उसके पति के फंड के रुपये भी आए। कुछ दिन तक सब कुछ सामान्य रहा। इसके बाद से परिवार वालों ने विधवा का बाहर आना-जाना बंद कर दिया। विरोध करने पर धमकाते भी थे। एक दिन इस खाते से नौ लाख रुपये निकाल लिए। बाकी रुपयों को फिक्स कराने के नाम पर 24 लाख रुपये तीनों ने अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। साथ ही करीब 15 लाख के आभूषण भी हड़प लिए। यह सब वे असहाय होकर सहती रहीं। इसी बीचजनवरी माह में प्रभा देवी के भाई संकठा प्रसाद का बेटा संजय उनका हालचाल लेने वहां पहुंच गया। उसे देखते ही वे फफक कर रोने लगीं। आपबीती सुनाई तो उनका पासबुक लेकर संजय बैंक पहुंच गया। रुपये निकाले जाने की पुष्टि होते ही कोतवाली पहुंच गया। वहां तहरीर दी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। शुक्रवार को एसडीएम मंगलेश दुबे से शिकायत की तो उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम भेज दी। टीम ने दबिश देकर पीड़िता को मुक्त करा लिया। एसडीएम ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। महिला को उनके भाई के सुपुर्द कर दिया गया है।
चंदवक थाना क्षेत्र के मढ़ी गांव निवासी प्रभा देवी के पति रामजीत का एक वर्ष पूर्व निधन हो गया था। वे एनएफएल में अभियंता थे। उन्हें कोई संतान नहीं थी। पति की मौत के बाद तेरहवीं में पहुंची विधवा की बहन धर्मावती देवी, बहनोई रामकेर और बेटा र¨वद्र ख्याल रखने का झांसा देकर अपने घर तरियारी ले आए। यहां के यूनियन बैंक की शाखा में उनका खाता खोलवाया गया। इसी में उसके पति के फंड के रुपये भी आए। कुछ दिन तक सब कुछ सामान्य रहा। इसके बाद से परिवार वालों ने विधवा का बाहर आना-जाना बंद कर दिया। विरोध करने पर धमकाते भी थे। एक दिन इस खाते से नौ लाख रुपये निकाल लिए। बाकी रुपयों को फिक्स कराने के नाम पर 24 लाख रुपये तीनों ने अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। साथ ही करीब 15 लाख के आभूषण भी हड़प लिए। यह सब वे असहाय होकर सहती रहीं। इसी बीचजनवरी माह में प्रभा देवी के भाई संकठा प्रसाद का बेटा संजय उनका हालचाल लेने वहां पहुंच गया। उसे देखते ही वे फफक कर रोने लगीं। आपबीती सुनाई तो उनका पासबुक लेकर संजय बैंक पहुंच गया। रुपये निकाले जाने की पुष्टि होते ही कोतवाली पहुंच गया। वहां तहरीर दी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। शुक्रवार को एसडीएम मंगलेश दुबे से शिकायत की तो उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम भेज दी। टीम ने दबिश देकर पीड़िता को मुक्त करा लिया। एसडीएम ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। महिला को उनके भाई के सुपुर्द कर दिया गया है।
