विदेशी सैलानियों को खुब लुभा रही है जौनपुर में स्थापित ऐतिहासिक इमारते

जौनपुर। भले ही शिराज ए हिन्द की सरजमी जौनपुर नाम पर्यटन स्थल के नक्से में दर्ज नही है इसके बाद भी विदेशी सैलानियों का यहां आना जारी है। सात समुन्दर पार से यहां पर स्थापित शर्की सल्तन की इमारतो का दीदार करने के लिए विदेशी पर्यटक यहां आ रहे है। शनिवार को फ्रांस से आये एक दर्जन महिला पुरूषो ने शाही किला अटाला मजिस्जद समेत दर्जनों इमारतों की खुबियों देखा। इन इमारते को देखते ही सभी सैलानियों के मुंह से एक शब्द निकला वानडर फूल ।
आदि गंगा गोमती के पावन तट पर बसा जौनपुर भारत के इतिहास में अपना विशेष स्थान रखता है। अति प्रचीन काल में इसका आध्यात्मिक व्यक्तित्व और मध्यकाल में सर्वागिक उन्नतिशील स्वरूप इतिहास के पन्नो पर दिखाई पड़ता है। शर्कीकाल में यह समृध्दशाली राजवंश के हाथो सजाया गया। उस राजवंश ने जौनपुर को अपनी राजधानी बनाकर इसकी सीमा दूर दूर तक फैलाया। यहां खुब सूरत शाही पुल का निर्माण बादशाह अकबर ने कराया था। शाही किला को फरोजशाह तुगलक ने बनवाया था।  अटाला मस्जिद, बड़ी मस्जिद, झझरी मस्जिद ,चार अंगुल समेत दर्जनो इमारतो का निर्माण शर्की बदशाहो ने कराया।  राजनीतिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक,कलात्मक और शैक्षिक दृष्टियो से जौनपुर राज्य की शान बेमिसाल थी। इतिहास के पन्नो में धनी होने के बाद भी जौनपुर को पर्यटन स्थन के नक्से से गायब है। लेकिन इसके बाद भी विदेशी सैलानी यहां पर आकर शर्की शासनकाल की कलात्मक शैली को देखने के लिए आते रहते है। आज फ्रांस से आये एक दर्जन विदेशी सैलानियो ने सभी ऐतिहासिक इमारतो को देखा।

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