जब से पाबन्द भयल पड़वा, खेतवा खा गइलन सड़वा
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केराकत(जौनपुर)नगर व क्षेत्र में इन दिनों "जब से पाबन्द भयल पड़वा"खेतवा खा
गइलन सड़वा"यह गीत क्षेत्र के किसानों के मुंह से सुनने को मिल रहा है जो
गीत के तर्ज पर इन दिनों किसानों के खेत मे छुट्टा पशू खेत मे बोये फसल को
मनमानी ठंग से खा जारहे है जो गीत असल मे चरितार्थ हो रहा है जिससे किसान
काफी परेशानियों का सामना कर रहे है।क्षेत्र के किसान इन दिनों छुट्टे
पशुओं के आतंक से काफी परेशान नज़र आ रहे हैं।नील गाय से छुटकारा मिला नहीं
की दूसरी बड़ी मुसीबत बन कर खेतों में दसकों की संख्या में साढ़,पड़वा खेतों
में घुस कर फसलों को खाने के साथ बर्बाद भी कर दे रहे हैं।अन्न दाताओं को
कभो ओले तो कभी बारिस न होना तो कभी असमय बरसात से जहां हमेशा चिंतित रहते
थे तो अब असमय छुट्टे पशुओं के खेतों में काफी संख्या में घुस कर फसलों के
बर्बादी से किसानो के माथे की अफसोस की लकीरे गहरी नज़र आ रहीं हैं।परेशान
किसान अपनी दुःख भरी दास्तान किससे कहे सोचनीय विषय हैं।किसानों ने शासन
का ध्यान छुट्टे पशुओं की तरफ आकृष्ट कराते हुए पशुओं से निजात दिलाने की
मांग किया है।जिसमे किसानों में रामशरण यादव,के के यादव,संजय पहलवान,प्रभात
यादव,राजेश यादव,सत्यनारायण चौहान,रामकेश पाल आदि किसानों ने सरकार से
गाँवो में सरकारी पशु शाला खोलवाने का मांग किया है।

