सुधार कर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं प्रत्यायन- प्रो एच डी रविंद्र
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जौनपुर।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के उमानाथ सिंह अभियांत्रिकी एवं
प्रौद्योगिकी संस्थान में तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम के
तत्वाधान में ' सुखद परिणाम आधारित शिक्षण एवं केंद्रीय प्रत्यायन परिषद्
की आकांक्षाएं ' विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ सोमवार को
विश्वसरैया सभागार में हुआ। कार्यशाला में पीपुल्स एजुकेशन कॉलेज ऑफ़
इंजिनियरिंग मांड्या, कर्नाटक से आये विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर एच डी
रविंद्र, प्रोफेसर वी दिनेश प्रभु, प्रोफेसर बी आर देवदत्त, प्रोफेसर के
रवि, प्रोफेसर एन एल मुरली कृष्णा एवं सुश्री श्वेता भटनागर ने विस्तार
पूर्वक चर्चा की।
कार्यक्रम में पीपुल्स एजुकेशन
कॉलेज ऑफ़ इंजिनियरिंग मांड्या, कर्नाटक के मैकेनिकल इंजिनियरिंग विभाग के
प्रोफेसर एवं संकायाध्यक्ष एच डी रविंद्र ने संस्था को प्रत्यायन प्राप्त
करने के लिए मानकों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संस्था अपना
शिक्षक- छात्र अनुपात, पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार कर
प्रत्यायन को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। संस्थानों को शिक्षा के साथ
अपने छात्रों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
इसी
क्रम में प्रोफेसर वी दिनेश प्रभु ने आउटकम बेस्ट एजुकेशन के विविध आयामों
पर विस्तृत चर्चा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक को छात्रों से बेहतर संवाद
करना चाहिए। बेहतर संवाद के आभाव में प्रभावी शिक्षण संभव नहीं है।
प्रोफेसर
बी आर देवदत्त ने उच्च स्तर एवं निम्न स्तर की सोच पर विस्तार से अपनी बात
रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व पर उसकी सोच का सबसे
बड़ा असर होता है। कहा कि यह शिक्षक का दायित्व बनता है कि वह अपने
छात्रों के सोच में परिवर्तन लाएं। इसके साथ ही उन्होंने थर्मोडायनेमिक्स
के विभिन्न पहलुओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने किसी संस्थान की
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कैसे पहचान बने इस पर भी अपनी बात
रखी।
कार्यक्रम का आयोजन तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर बीवी तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर
डॉ
संतोष कुमार, डॉ राजकुमार, डॉ रजनीश भास्कर, डॉ संजीव गंगवार, डॉ
अमरेंद्र सिंह, शैलेश कुमार प्रजापति,प्रवीण सिंह समेत शिक्षक मौजूद
रहे।
