वसीम रिजवीं के खत से जौनपुर के मुसलमान खफा
https://www.shirazehind.com/2018/03/blog-post_82.html
जौनपुर। राम मंदिर का फैसला आने पूर्व उत्तर प्रदेश में एक और बवाल खड़ा हो गया है।
यह बवाल खड़ा किया है उत्तर प्रदेश के शिया पर्सनल लाॅ बोर्ड के चेयर मैन
वसीम रिजवीं ने। उन्होने आल इण्डिया पर्सनल लाॅ बोर्ड को एक पत्र भेजा है
कि देश के नौ मंदिरो को तोड़कर मस्जिद बनाये गये मस्जिदो को पुनः हिन्दुओ के
हवाले कर दिया जाय। जिसमें जौनपुर की ऐतिहासिक अटाला मस्जिद भी शामिल है।
यह खबर मिलते ही जौनपुर के मुसलमानों में खासा गुस्सा है। सभी ने इसकी घोर
मजमम्त करते हुए इसका जिम्मेदार सीधे आरएसएस को ठहराया है।
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बयान पर जौनपुर में भी बवाल मचा हुआ है अटाला मस्जिद के सेक्रेटरी समेत कई मौलाना और समाजसेवी इस बयान को 2019 के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं ।कुछ लोग इसे वसीम रिजवी को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का बता रहे हैं ।कुछ वक्ताओं ने अपने बयान में वसीम रिजवी पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। वसीम रिजवी ने देश की जिन 9 मस्जिदों पर सवाल उठाए हैं उनमें एक जौनपुर की अटाला मस्जिद भी है।शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने वैसे मस्जिदों की फेहरिस्त अपनी चिट्ठी में लिखी है जो ऐतिहासिक रूप से मंदिरों को तोड़कर मस्जिद में तब्दील किए गए हैं.
जिन बड़े मस्जिदों की फेहरिस्त इस चिट्ठी में शामिल है उसमें कुतुब मीनार की मस्जिद कुतुब उल इस्लाम मस्जिद, केशव देव मंदिर मथुरा अदीना मस्जिद पश्चिम बंगाल काशी विश्वनाथ मंदिर अटाला देवी मंदिर जौनपुर, विजया मंदिर मध्य प्रदेश सहित कुल 9मंदिर शामिल है.
वसीम रिजवी ने अपने-अपने खत में साफ लिखा है कि मुगल बादशाहों ने हिंदुस्तान को लूटा, हुकूमत की और तमाम मंदिरों को तोड़ा और जहां मस्जिदे बनवा दी। जिसका गवाह इतिहास है ऐसे में कब्जाई गई जगह पर मस्जिद खुदा भी कुबूल नहीं करता ना ही यहां की नमाज कबूल होती है ऐसे में इन सबों को हिंदू समाज को वापस कर दिया जाना चाहिए।
अटाला मस्जिद के जनरल सिक्रेट्री मो0 खालिद पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद समेत कई मुसलमानों ने इस नये बवाल के पिछे आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह 2019 लोकसभा चुनाव की नींव डाली जा रही है। ये लोग चाहते है कि इसके माध्यम से हिन्दू मुस्लिम को बाटकर लोकसभा फतेह किया जाय।
उधर व्यापारी नेता आरिफ हबीब ने वसीम रिजवीं को नास्तिक करार देते हुए कहा कि जिस तरह से मुसलमानो ने तसल्लिमा नसरीन फिदा हुसैन को नकार दिया उसी तरह से इन्हे भी नकार देना चाहिए
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बयान पर जौनपुर में भी बवाल मचा हुआ है अटाला मस्जिद के सेक्रेटरी समेत कई मौलाना और समाजसेवी इस बयान को 2019 के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं ।कुछ लोग इसे वसीम रिजवी को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का बता रहे हैं ।कुछ वक्ताओं ने अपने बयान में वसीम रिजवी पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। वसीम रिजवी ने देश की जिन 9 मस्जिदों पर सवाल उठाए हैं उनमें एक जौनपुर की अटाला मस्जिद भी है।शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने वैसे मस्जिदों की फेहरिस्त अपनी चिट्ठी में लिखी है जो ऐतिहासिक रूप से मंदिरों को तोड़कर मस्जिद में तब्दील किए गए हैं.
जिन बड़े मस्जिदों की फेहरिस्त इस चिट्ठी में शामिल है उसमें कुतुब मीनार की मस्जिद कुतुब उल इस्लाम मस्जिद, केशव देव मंदिर मथुरा अदीना मस्जिद पश्चिम बंगाल काशी विश्वनाथ मंदिर अटाला देवी मंदिर जौनपुर, विजया मंदिर मध्य प्रदेश सहित कुल 9मंदिर शामिल है.
वसीम रिजवी ने अपने-अपने खत में साफ लिखा है कि मुगल बादशाहों ने हिंदुस्तान को लूटा, हुकूमत की और तमाम मंदिरों को तोड़ा और जहां मस्जिदे बनवा दी। जिसका गवाह इतिहास है ऐसे में कब्जाई गई जगह पर मस्जिद खुदा भी कुबूल नहीं करता ना ही यहां की नमाज कबूल होती है ऐसे में इन सबों को हिंदू समाज को वापस कर दिया जाना चाहिए।
अटाला मस्जिद के जनरल सिक्रेट्री मो0 खालिद पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद समेत कई मुसलमानों ने इस नये बवाल के पिछे आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह 2019 लोकसभा चुनाव की नींव डाली जा रही है। ये लोग चाहते है कि इसके माध्यम से हिन्दू मुस्लिम को बाटकर लोकसभा फतेह किया जाय।
उधर व्यापारी नेता आरिफ हबीब ने वसीम रिजवीं को नास्तिक करार देते हुए कहा कि जिस तरह से मुसलमानो ने तसल्लिमा नसरीन फिदा हुसैन को नकार दिया उसी तरह से इन्हे भी नकार देना चाहिए
