बरसठी रेलवे स्टेशन पर समस्याओं का अंबार
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जौनपुर। देश को आजाद हुए लगभग सात दशक से ज्यादा हो गया । जमाना बदल गया , दुनिया का हर देश नित नई नई बुलंदियों को छू रहा है अगर कुछ नही बदला है तो अंग्रेजों के जमाने मे बना जिले के बरसठी स्टेशन की तसवीर , जिसे देखकर आज के इक्कीसवीं सदी में कोई भी सिर्फ और सिर्फ अपना माथा पकड़कर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को कोसता हुआ मिलेगा । इलाहाबाद से जौनपुर वाया जंघई होते हुए जंघई और मड़ियाहूं के बीच मे बरसठी स्टेशन पड़ता है । दस वर्ष पहले तक सिर्फ इलाहाबाद और जौनपुर के बीच सिर्फ एक ट्रेन चलती थी इलाहाबाद जौनपुर एजे पैसेंजर। । सुबह जौनपुर से इलाहाबाद ,इलाहाबाद से जौनपुर । समय के मांग के अनुसार जनता की मांग पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रयास से इस रूट पर और और भी ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ जिसमें प्रमुख रूप से जौनपुर से रायबरेली इण्टर सिटी एक्सप्रेस, कुर्ला टर्मिनल से छपरा वाया गोरखपुर , दादर एक्सप्रेस, सुहेलदेव एक्सप्रेस जो दिल्ली तक की सफर कराती है । फैजाबाद एक्सप्रेस ,सप्ताह में एक दिन तुलसी एक्सप्रेस तमाम ट्रेनें बरसठी स्टेशन से होकर गुजरती हैं । हालांकि इंटर सिटी एक्सप्रेस को छोड़कर अन्य ट्रेनों का ठहराव इस स्टेशन पर नही है ।शाम को ए जे जौनपुर से प्रयाग होते हुए बरेली वाया लखनऊ जाती है । प्रतिदिन इस स्टेशन से हजारों यात्री अपने गंतव्य को जाते है । यात्री सुविधा के नाम पर इस स्टेशन पर कोई भी सुबिधा उपलब्ध नही है ।पेयजल के लिए बना पेयजल घर तथा महिलाओं के लिए बना शौचालय अपनी दुर्दशा पर आंशू बहा रहा है । इस भीषण गर्मी में यात्रियों को पीने के लिए कोई भी विधायक या सांसद एक अदद इंडिया मार्का हैंडपम्प भी आज तक नही लगवा पाया है । स्टेशन पर चाय स्टाल मालिक ध्रुव गुप्ता एक छोटा नल लगवाया था जो आज हर यात्री को पानी के नाम पर मुंह चिढ़ाता हुआ दिख जाएगा । रोशनी के नाम पर अंग्रजो के जमाने मे लगी ढबरी है ,वह भी सदा के लिए बुझ गयी है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय हीरावती देवी ने प्रमुख निधि से सोलर लाइट रात में आने जाने वाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते लगवाया था । वह भी क्षेत्रीय नशेड़ियों की भेंट चढ़ गया । शाम होते ही पूरा स्टेशन घुप्प अंधेरे के आगोश में चला जाता है । यात्रियों के बैठने के लिए बनी कुर्सियों पर बैठने का मतलब है कि आ बैल मुझे मार वाली कहावत चरितार्थ करती हैं ।

