ब्रिटिश हुकूमत के समय का भंन्नौर रेलवे स्टेशन का हाल होते जा रहा बद से बत्तर
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भंनौर (जौनपुर)। सरकार यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे
स्टेशनों को वाई फाई और डिजिटलीकरण के साथ अन्य सुविधाएं दे रही है लेकिन
सरकार की उदासीनता के कारण ग्रामीण इलाकों के स्टेशन इन सुविधाओं से वंचित
हैं। ग्रामीण क्षेत्र का भंनौर स्टेशन आज भी अपनी स्थिति पर आंसू बहा रहा
है। ब्रिटिश जमाने के इस स्टेशन पर आज भी यात्रियों को पीने का
पानी,शौचालय,बिजली के लिए काफी मुसीबत झेलनी पड़ती है।
भंनौर रेलवे स्टेशन सौ साल से अधिक समय से ब्रिटिश हुकूमत के
दौरान बना था। उस समय यात्रियों को पीने का पानी,शौचालय की व्यवस्था थी
लेकिन आज सरकार स्टेशनों को सुविधाओं से लैस और आधुनिकीकरण स्टेशन बनाने का
दावा कर रही है। परंतु इस स्टेशन पर से अपनी नजर ही हटा ली जिसके कारण आज
भंनौर स्टेशन हाल्ट स्टेशन में बदल चुकी है।
ऐसा नहीं है कि इस स्टेशन पर ट्रेनों का आवागमन नहीं है।
प्रतिदिन इस रूट से गोदान एक्सप्रेस, अप डाउन फैजाबाद-मुंबई एक्सप्रेस,
आजमगढ़ एक्सप्रेस दिल्ली जाने के लिए सुहेलदेव एक्सप्रेस, बरेली इंटरसिटी
के साथ ऐजे पैसेंजर ट्रेन चलती है। उसके बाद भी इस स्टेशन पर ट्रेनों का
ठहराव नहीं है और यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नही है। यात्रियों को
बैठने के लिए बेंच टूटी है, पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। एक
मात्र हैण्डपंप खराब पड़ा है। शौचालय के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। यात्रा
के लिए ट्रेन के इंतजार में महिलाओं को स्टेशन पर शौचालय न होने से काफी
दिक्कतें होती है। इस स्टेशन की उपेक्षा का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र के
प्रतिनिधि है। चुनाव जीतने के बाद सांसद अपना वादा भूल जाते हैं, इसी के
कारण आज भंनौर स्टेशन की यह हाल है। 1942भारत छोड़ो आन्दोलन के समय भन्नौर (पक्की कोट )निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व0 अवधेश सिंह ने अपने पढ़ाये हुए बच्चों के साथ रेल की पटरी उखाड़ दिये थे एवं टेलीफोन के तार को काट कर अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर दिये थे तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत सरकार में बाइस महिने जेल में रहें, जिस गाँव में लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोगों का आना जाना रहा ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के गाँव का स्टेशन उपेक्षा का शिकार होना आम जनमानस को व्यथित करता है

