कर्बला के शहीदों ने हमें जीने का सलीका सिखाया : मौलाना गुलाम अली खान

जौनपुर। कर्बला के शहीदों ने हमें जीने का सलीका सिखाया। आज हम सबको उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की जरूरत है जिस तरह से हजरत इमाम हुसैन ने अपने पूरे परिवार के साथ मानवता और इंसानियत की रक्षा के लिए 72 लोगों की शहादत दी थी उसे शायद ही कोई भुला सकता है। एक दिन मौत तो सबको आनी है पर जो अपनी जान दे कर दूसरों की जिंदगी में खुशियां भर दें उसे हम कभी भुला नहीं सकते। असली जिंदगी तो मौत के बाद शुरू होती है जब इंसान को अपने कर्मों का फल अल्लाह देता है। ऐसे में हम सब को चाहिए कि दूसरों की मदद करते रहना चाहिए। उक्त बातें रविवार को बलुवाघाट के इमामबाड़ा मीर सैयद अली मरहूम में मजलिस को खेताब करते हुए हरिद्वार उत्तराखंड से आए मौलाना गुलाम अली खान ने कही। मरहूम सैयद वसी हैदर की बरसी की मजलिस को खेताब करते हुए उन्होंने कहा कि कर्बला के 72 शहीदों ने पूरी दुनिया को जीने का असली मकसद शहादत देकर बता दिया। इससे पूर्व सोजख्वानी महताब हुसैन व उनके हमनवां ने पढ़ा, पेशखानी सोहरत व तनवीर जौनपुरी ने किया। बाद खत्म मजलिस अंजुमन अजाए अहेलेबैत सिपाह नौहाखानी व सीनाजनीं ने किया। इस मौके पर सैयद शाहवेज हैदर, सैयद फरमान हैदर, सैयद कायम रजा, सय्यद अंजार क़मर, सैयद हेलाल कमर, सै. अर्श अब्बास, डॉ. मोहम्मद रजा बेग, रिजवान हैदर राजा, आजम ज़ैदी, फैसल हसन तबरेज, शाहिद मेंहदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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