फसल अवशेष जलाने पर होगा जुर्माना,सब्सिडी वाली योजनाओं से भी बाहर होंगे किसान
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जौनपुर : फसलों के अवशेष खेतों में जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग ने न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता टीम लगाई है , गोष्ठीया आयोजित कर किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है खास बात यह है कि फसलों के अवशेष जलाने वालों पर जुर्माना तो लगेगा ही वह कृषि विभाग के सब्सिडी वाली योजनाओं से भी बाहर किए जाएगे ।
धान की फसल की कटाई का समय चल रहा है कटाई के बाद किसान अपने खेतों में ही धान सहित अन्य फसलों के अवशेष ठूठ , पत्ती , जड़ आदि जला देते हैं। अपशिष्ट जलाने से मृदा की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है और लगातार ऐसा होने से खेत बंजर भी होने लगते हैं साथ ही पर्यावरण भी प्रदूषित होता है किसानों को फसलों के अवशेष जलाने से रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है फसलों के अवशेष जलाने से रोकने के लिए जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है इसके बाद भी अज्ञानता में किसान फसलों के अवशेष जलाते हैं , इसे रोकने के लिए अब कृषि विभाग ने अभियान चलाया है काफी दिनों से गांव में गोष्ठीओं का आयोजन किया जा रहा है । विभाग द्वारा न्याय पंचायत स्तर पर लगाई गई टीम खेतों में फसल के अवशेष जलाने वालों को चिन्हित करेगी जहां मशीनों से फसलों की कटाई होती है वहां मशीनों के साथ एक स्ट्रा रीपर का प्रयोग भी अनिवार्य कर दिया गया है।
विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि डॉ0 रमेश चंद्र यादव के अनुसार न्याय पंचायत स्तर पर क्षेत्रीय कर्मचारियों की टीम गठित की गई है फसलों के अवशेष जलाने वाले कृषकों पर कार्यवाही होगी , उन्होंने कहा कि किसान अवशेष जलाने के बजाय उसे मृदा में सड़ा कर उससे खाद बनाए । ये है सजा - फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ तक जमीन वाले किसान पर ढाई हजार रुपया 5 एकड़ तक की जमीन वाले किसान पर पाच हजार रुपये , इससे अधिक जमीन वाले किसानों पर पन्द्रह हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। दूसरी बार जलाए जाने पर किसानों को कृषि विभाग से मिलने वाली सब्सिडी योजनाओं के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। फसल के अवशेष जलाने से हानि 1 - फसलों के अवशेष जलाने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं 2- मृदा का तापमान बढ़ने से पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। 3 - किसान मित्र कीट जलकर मर जाते हैं मृदा की उर्वरता में गिरावट आ जाती है मृदा का स्वभाव बदलने लगता है वह बंजर होने की कगार की ओर बढ़ने लगती है। फसल अवशेष न जलाने से लाभ
1- मृदा में जीवाश्म की बृद्धि होती है। जिससे मृदा स्वास्थ्य अक्षुण्ण बना रहता है।
2 - मित्र कीट सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
3 - मृदा में जल धारण की क्षमता में बृद्धि होती है।
4 - पर्यावरण सुरक्षित रहता हैं।
5 - किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने हेतु 50 प्रतिशत तक का अनुदान। कस्टम हाईरिंग केन्द्र स्थापित करने हेतु 80 प्रतिशत तक का अनुदान।

