कमीशन के खेल में दब गया शासनादेश

जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दो दो सेट स्कूली ड्रेस दी जाती है। पिछले शैक्षिक सत्र में ड्रेस की कीमत 200 रुपये थी जोकि अब बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई। प्रति बच्चा दो सेट के हिसाब से 600 रुपये की ड्रेस बनेगी। जिले में चार लाख 69 हजार 447 बच्चों की ड्रेस बननी है। शासनादेश के अनुसार कपड़ा खरीद कर बच्चों की नाप के अनुसार टेलर से ड्रेस सिलाई जाए। जो कपड़ा खरीदा जाए उसका नमूना भी विद्यालय में रखा जाए और नाप का भी रजिस्टर बने, लेकिन कमीशन के खेल में शासनादेश दब गया है। कपड़ा खरीद कर ड्रेस नहीं सिलवाई जा रही है बल्कि फर्मों से ठेके पर ड्रेस सिल रही है। पूरे जिले में खेल चल रहा है। ड्रेस आपूर्ति की होड़ लगी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार गत वर्ष 200 रुपये की ड्रेस बनी थी, इस बार 300 रुपये कर दिए गए लेकिन अधिकांश विकास खंडों में पूरी ही ड्रेस सेट की जा रही है। जिसकी 200 रुपये के बजाए अधिकतम 150 रुपये कीमत थी और उसी को 300 रुपये के नाम पर विद्यालयों में भेजे जाने की सेटिग चल रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों से लेकर स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली लोगों का विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों पर ड्रेस खरीदने के लिए जोर पड़ रहा है। अध्यापकों का कहना है कि चाहते हुए भी वह अच्छी ड्रेस नहीं ले पाते, फर्म के लोग आते हैं और फोन पर अधिकारी या किसी नेता से बात करा देते हीं। उसी की ड्रेस खरीदनी होती है। बीएसए का कहना है कि किसी भी कीमत पर ड्रेस में कमीशनबाजी नहीं होने दी जाएगी।

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