कलयुग केवल नाम अधारा ,सुमिर -सुमिर नर उतरे पारा

जौनपुर।  बरसठी  क्षेत्र के गोपालपुर गांव में श्रीमदभागवत महापुराण का आयोजन किया गया । पाँचवे दिन प्रसिध्द कथावाचक   स्वामी आत्मानंद  ने कहा कि  एक बाप चार बेटे को आसानी से पाल-पोस लेता है और उनकी जवानी तक उनकी देख रेख करता है पर चारो बेटे मिलकर उसी बाप का बृद्धा अवस्था मे उनका देख रेख नही कर पाते। उन्होंने कहा यह कलयुग है , कलयुग केवल नाम अधारा ,सुमिर -सुमिर नर उतरे पारा । कथा में कहा कि एक प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाने के कारण अर्जुन ,भीम, नकुल,शहदेव सभी जेल में बंद है और युधिष्ठिर ने अंततः सारे प्रश्नों का उत्तर दिया और अपने समस्त भाइयों को जेल से छुड़ा लिया । इसे कहते हैं ज्ञान को लेकर आज प्रसंग छिड़ी और यहाँ पर सारे श्रोताओं का मन मोह लिया और सभी झूमने लगे । उन्होने कहा कथा वाचक को तभी कथा कहने में आंनद आता है जब श्रोता सुनते है। मनुष्य जब तक ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति व सांसारिक सुख लेने की प्रवृत्ति को नहीं मिटाता है तब तक कितना ही समझदार व पढ़ा लिखा क्यों न हो उसे आनन्द की प्राप्ति नहीं हो सकती है। श्रद्धा के अनुसार ही व्यक्ति का आचरण होता है।   कहा कि त्याग व शान्ति मनुष्य को गुणवान बनाती है और यह करूणा की तरह एक पुष्प है जिसकी सुगन्ध कभी भी मलिन नहीं होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत एक मोक्षपरक ग्रन्थ है,जिसके श्रवण मात्र से ही जीतेजी क्रोध, लोभ, मोह आदि से मुक्ति मिलती है। स्वामी आत्मानंद जी ने कहा कि भागवत, आयोजनकर्ता ही नहीं अपितु सुनने वालों के भी पितृ संतुष्ट होते हैं और ईष्ट की संतुष्टि से सुख की प्राप्ति होकर मनुष्य को दुरूखों से मुक्ति मिलती है।

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