जज ने दर्ज कराया जालसाज़ी का मुकदमा

जौनपुर।  फर्जी मोहर लगा कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाकर गिरफ्तारी वारंट व रिकवरी वारंट का निष्पादन थाने से रुकवाने के आरोपी विपक्षी पति सद्दाम के खिलाफ परिवार न्यायालय द्वितीय के न्यायाधीश ने लाइन बाजार थाने में धोखाधड़ी व जालसाजी की धाराओं में मंगलवार को मुकदमा दर्ज कराया।
न्यायाधीश ने लाइन बाजार थाने में एफआईआर दर्ज कराया कि रहमुन्निशा बनाम सद्दाम पत्रावली 20 नवंबर 2019 को पेश हुई। रहमुन्निशा ने दरखास्त दिया कि मुकदमे में जुलाई 2018 में 2000 रु. अंतरिम भरण पोषण का आदेश कोर्ट ने दिया जो पति सद्दाम द्वारा उसे अदा किया जाना था। उसने कुल दो हजार रुपये अदा किया। उसके खिलाफ कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट व रिकवरी वारंट का अनुपालन थानाध्यक्ष लाइन बाजार द्वारा नहीं कराया गया। उन्होंने कोर्ट के आदेश की अवहेलना किया। कोर्ट ने पाया कि पति पर 28 हजार रुपये भरण-पोषण बकाया है। 11 नवंबर 2019 को पति के खिलाफ जारी वारंट थाने से अदम तामील इस पृष्ठांकन के साथ वापस कर दिया गया कि विपक्षी ने अपने खिलाफ जारी वारंट कोर्ट में हाजिर होकर स्थगित करा लिया है। कोर्ट द्वारा जारी प्रपत्र पर कोर्ट की मोहर व अस्पष्ट तिथि मौजूद थी जबकि पत्रावली में यह भी था कि उसने वारंट निरस्त करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया लेकिन न तो वह कोर्ट में उपस्थित हुआ न ही उसके अधिवक्ता आए। दोनो वारंट स्थगित होने के संबंध में आदेश का प्रपत्र कूट रचित दस्तावेज है जो गंभीरतम अपराध की श्रेणी में आता है। सद्दाम द्वारा न्यायालय एवं पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से कूटरचित आदेश बनाकर पुलिस अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया जिससे उसके विरुद्ध जारी वारंट का निष्पादन न हो सके। कोर्ट ने आरोपी सद्दाम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की और मामले में संलिप्त अन्य लोगों की भूमिका एवं विपक्षी के अधिवक्ता व न्यायालय के वाद लिपिक से भी पूछताछ को कहा। कोर्ट ने सद्दाम के खिलाफ गिरफ्तारी व रिकवरी वारंट 17 दिसंबर 2019 की तिथि नियत करते हुए जारी किया।

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