शिक्षक पाठ्यपुस्तकों के जरिये ज्ञान परोसें
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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानन्द केंद्रीय पुस्तकालय में तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन मंगलवार को किया गया। पुस्तक प्रदर्शनी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर डॉ राजाराम यादव नें कहा कि पुस्तकालय ज्ञानोपयोगी पुस्तकों के चयन का माध्यम है। समृद्ध पुस्तकालयों का अपना एक अलग महत्व है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों को ज्ञानोपयोगी पुस्तकों और क्लास नोट्स को प्रकशित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आज भी विदेशी लेखकों की महंगी किताबों पर आश्रित होना पड़ता है। शिक्षक अपने ज्ञान को पाठ्यपुस्तकों के जरिये प्रकाशित करें। इससे हमारे शिक्षक देश ही नही विदेश के विद्यार्थियों में भी अपार लोकप्रियता हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें देवता सरीखी हैं। बाबा भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के पुस्तकालयाध्यक्ष डा0 सुनील गोरिया नें कहा कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए पुस्तकें लाभकारी होती हैं। पुस्तक प्रदर्शनी में एक साथ प्रकाशक और पाठक दोनों उपस्थित होते हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति कलाम की उक्ति को लोगों से साझा किया कि एक अच्छी पुस्तक सौ मित्रों से बेहतर है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डिजिटल ज्ञान विस्तार ले रहा है। ईबुक्स से ज्यादा पाठक आज भी मुद्रित किताबों के हैं। ऐसे में गंभीर अध्ययन या सन्दर्भ के लिए अच्छे पुस्तकालयों की जरूरत सदा बनी रहेगी । इसके पूर्व एलस वीयर की एशिया हेड सुश्री संगीता ने प्रदर्शनी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। विवेकानन्द केंद्रीय पुस्तकालय के मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रोफेसर मानस पांडेय ने प्रदर्शनी में आये समस्त अतिथियों और प्रकाशकों का स्वागत किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों से इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर ज्ञान अर्जन की अपील की। वित्त अधिकारी एमके सिंह ,परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह,प्रो अशोक श्रीवास्तव , डॉ विजय कुमार सिंह,प्रो रामनारायण प्रो राजेश शर्मा ,डॉ0 संदीप सिंह , डॉ0 मनोज मिश्र प्रकाशक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

