भक्त की भावना सच्ची हो तो नंगे पांव दौड़ आते है भगवान: प्रकाशचन्द्र पांडेय
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सिकरारा(जौनपुर)मड़ियाहूं क्षेत्र के मलिकानपुर गांव में चल रहीसंगीतमय सात
दिवशीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा सुनने के लिए
श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथाब्यास प्रकाश चंद्र पांडेय 'विद्यार्थी' ने
पंडाल में बैठे हुए श्रद्धालुओं को श्रीमद भागवत कथा का रसपान कराया।
कहा
कि भगवान को यदि सच्चे मन से पुकारा जाए तो भगवान नंगे पांव दौड़े आते हैं।
भक्त की भावना सच्ची होनी चाहिए। सुदामा की भक्ति सच्ची थी, इसलिए भगवान
श्रीकृष्ण नंगे पांव दौड़े आए। दूसरा उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि
रुकमणि ने मन ही मन कन्हैया को अपना वर मान लिया था, परंतु रुकमणि का विवाह
शिशुपाल से कराया जा रहा था। इस पर रुकमणि जी ने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश
भेजा। संदेश पाते ही भगवान दौड़े चले आए और गौरी पूजन के समय रुकमणि को साथ
ले गए। विरोध कर रहे राजाओं को भी उन्होंने परास्त किया। इसलिए माया रूपी
इस दलदल को पार करने का एकमात्र उपाय भगवान की सच्ची भक्ति एवं सत्कर्म
करना है। उन्होंने कहा कि कथा से ही व्यथा का नाश होता है। जो मनुष्य
परमात्मा के नित्य वंदन व सत्संग में लगा रहता है वह कभी दुखी नहीं होता और
उसे संसार की किसी व्यथा का सामना नहीं करना पड़ता। आरती से पूर्व उन्होंने
श्रीकृष्ण भक्ति के भजन गाकर उपस्थिति को मंत्रमुग्ध कर दिया। समागम में
महंत रमेश दास जी, महंत राजगिरि व महंत श्रीचंद जी ने भी शिरकत की।
शिक्षाविद् गोपाल शर्मा ने सभी का सहयोग के लिए धन्यवाद किया। इस अवसर पर
मुख्य
यजमान श्री पाल सिंह व उनके तीनो पुत्र रमेश सिंह, राजेश सिंह
राजेश्वरानंद, विकास सिंह ने सपत्नीक श्रीमद् भागवत ग्रन्थ का पूजन अर्चन
किया। यज्ञाचार्य अतुल कुमार मिश्र, नीरज शास्त्री, विकास चंद्र मिश्र आदि
संतो द्वारा बीच-बीच मे संगीतमय भजन सुनाकर लोगो को भावविभोर कर दिया। इस
अवसर पर माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रांतीय प्रधान महासचिव
अखिलेश सिंह, श्यामधर मिश्र, मड़ियाहूं पीजी कालेज के प्राचार्य डा. एस के
सिंह, आनन्द त्रिपाठी, अजय मिश्रा, कमलेश मिश्रा, डा.धर्मेन्द्र कुमार
सिंह, सुजीत यादव आदि ने कथावाचक का माल्यार्पण कर अंगवस्त्रम भेंट किया।

