वैश्विक अर्थव्यवस्था भी लगभग ढहने के कगार पर : रमेश सिंह
https://www.shirazehind.com/2020/04/blog-post_860.html
जौनपुर। वर्तमान परिवेश में जबकि कोरोना वायरस से पूरी दुनिया न केवल परेशान है बल्कि इसका सामना करने में पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था भी लगभग ढहने के कगार पर खड़ी हो चुकी है। तब माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी रमेश सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को पत्र लिखकर वर्तमान आर्थिक संकट से निजात पाने का बहुमूल्य सुझाव शिक्षकों/ कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने के रूप में दिया है। पत्र के माध्यम से उन्होंने अवगत कराया है कि 01अप्रैल 2004 के पश्चात से शिक्षकों/कर्मचारियों के लिए लागू नवीन अंशदायी पेंशन योजना के अन्तर्गत शिक्षकों/ कर्मचारियों के वेतन से 10%की कटौती करते हुए सरकार द्वारा अपने अंशदान के रूप में 14% की धनराशि अवमुक्त करते हुए सम्पूर्ण धनराशि नामित ट्रस्ट को सौंप दी जाती है जो इस धनराशि का विनियमन करते हुए इससे अर्जित फंड से शिक्षकों/कर्मचारियों के अवकाश ग्रहण करने के पश्चात पेंशन की व्यवस्था करेगा।इस व्यवस्था का सबसे बड़ा दोष यही है कि इसमें योगदान करने वाले किसी भी पक्ष का इस पैसे (जो कि हजारों/ लाखों करोड़ भी हो सकता है) पर न तो कोई नियंत्रण होता है और न ही वह अपनी सुविधानुसार इसका उपयोग कर सकता है। इसी कमजोर कड़ी को समाप्त करने और सरकार के खाते में हजारों करोड़ रुपये की तरलता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रमेश सिंह द्वारा पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की मांग की गयी है। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर देने से जहाँ सरकार को अभी तक ट्रस्टियों के पास जमा हुए सारे पैसे मिल जाएंगे वहीं उसे हर माह 14% दिए जाने वाले अंशदान से भी मुक्ति मिल जायेगी। इतना ही नहीं शिक्षकों/ कर्मचारियों के वेतन से होने वाली हर माह 10% की कटौती ( जो हजारों करोड़ रुपये हो सकती है)भी सीधे राजकोष में जमा होती रहेगी जिसका दीर्घकालिक उपयोग सरकार द्वारा विकास कार्यों के साथ-साथ वर्तमान आर्थिक चुनौतियों से निपटने में किया जा सकेगा ।यदि सरकार द्वारा पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर दी जाय इससे न केवल शिक्षकों/ कर्मचारियों का भला हो सकेगा बल्कि सरकार को भी इसके लिए चलाए जाने वाले आन्दोलनो से भी मुक्ति मिल जायेगी और एकमुश्त लाखों करोड़ रुपए की व्यवस्था भी हो जाएगी। शिक्षकों/ कर्मचारियों द्वारा सरकार को भी अभूतपूर्व समर्थन और सहयोग निश्चित रूप से मिलेगा जिससे कोरोना संकट और आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सहूलियत होगी।संकट के इस दौर में यदि सरकार और उसके मुखिया ने कुशल नेतृत्व किया है तो सरकारी कर्मचारियों जिसमें जिलाधिकारी से लेकर पटवारी तक ,डाक्टर साहब एवं अन्य स्वास्थयकर्मी, पुलिस बल, सफाई कर्मचारी से लेकर शिक्षकों तक सभी ने तन-मन-धन से सहयोग करके भारत और भारतीय प्रधानमंत्री को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित होने का अवसर भी दिया है। इस लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर शिक्षकों/कर्मचारियों को सम्मान जनक जीवन यापन हेतु बुढापे की लाठी देने की सरकार महती कृपा करे।

