गया था गाड़ी चलाने , चरा रहा है ऊंट

जौनपुर।  पेट्रो डालर कमाने का सपना संजोए सऊदी अरब गए मामा-भांजे की जिदगी अब नारकीय हो गई है। कबूतरबाज कंपनी ने वाहन चालन का वीजा देकर भेजा लेकिन वहां नियोक्ता (मालिक) उनसे ऊंट चरवा रहे हैं। दोनों ने भारतीय दूतावास से अपना दुखड़ा साझा करते हुए वतन वापसी की गुहार लगाई है। इस पर दूतावास ने नियोक्ता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
 शाहगंज तहसील के बड़ागांव निवासी नरसिंह मौर्य व उसका भांजा सुनील मौर्य गतवर्ष अगस्त में सऊदी अरब के दम्माम शहर में कमाने गए थे। मुंबई की एक कंपनी ने उन्हें बतौर ड्राइवर वीजा जारी किया था। वहां पहुंचने पर नियोक्ता ने वाहन चलाने की बजाय ऊंट चराने का काम दे दिया। इस दौरान कोई रास्ता नजर न आने पर मामा-भांजे ने इसे ही अपनी नियति मानते हुए स्वीकार कर लिया। कुछ दिनों तक तो सब ठीक-ठाक चला लेकिन एक दिन अचानक सुनील की तबीयत खराब हो गई। मालिक ने उसे कोरोना वायरस संक्रमित बताकर घर से निकाल दिया। सुनील कई दिनों तक रेतीले जंगल में भूख-प्यास से व्याकुल भटकता रहा। उसने अपनी पीड़ा मामा नरसिंह मौर्य को बताई। नरसिंह ने मोबाइल फोन से स्वजनों को व्यथा सुनाई। इसके बाद स्वजनों की रात की नींद और दिन का चैन हराम हो गया। नरसिंह के बड़े भाई ओम प्रकाश ने दोनों की स्वदेश वापसी के लिए भागदौड़ शुरू कर दी। इसी क्रम में उनकी मुलाकात कादीपुर (सुल्तानपुर) निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक से हुई। अब्दुल हक की कोशिशों से पीड़ितों की शिकायत सऊदी स्थित भारतीय दूतावास में दर्ज हो गई है।


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