ताल पोखरे सूखे, पशु पक्षियों में व्याकुलता

जौनपुर। जून माह में पारा 40 सेंटीग्रेट से ऊपर है। भीषण गर्मी व तपिश ने मानव ही नहीं पशु-पक्षियों को बेहाल कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ तालाब, पोखरों व अन्य जलस्त्रोतों में धूल उड़ रही है। प्यास बुझाने के लिए बेजुबान भटक रहे हैं। जिम्मेदार सूखे तालाबों को को भरने की व्यवस्था नहीं कर रहे। यहीं स्थिति रही तो पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा। आदर्श जलाशय भी सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।   अधिकांश तालाब में पानी नहीं है। लाखों रुपये से बनाये गए यह तालाब बेमकसद साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि तालाबों में पानी उपलब्ध कराया जाए। मछलीशहर के देवरिया, जमालपुर, पकड़ी, नोनराखुर्द, अमारा सहित दर्जनों गांव में खोदे गए पोखर व अन्य जलाशयों सूख पड़े हैं। यदि समय रहते तलाबो में पानी नहीं भरा गया तो हैंडपंप भी पानी छोड़ देंगी । थानागद्दी क्षेत्र में लगभग छह चेक डैम, एक नहर व सभी गांवों में मनरेगा के तहत खोदे गए तालाब होने बावजूद भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। वजह, भूजलस्तर नीचे खिसकने से तालाबों, नहरों व नदियों में पानी नहीं दिखाई दे रहा है। जल के सभी स्त्रोत सूखे पड़े हुए हैं। पानी न होने से जानवरों , पशु-पक्षियों को प्यास बुझाने के लिए इधर- उधर भटकना पड़ रहा है। नदी व जंगली क्षेत्रों में रह रहे जानवरों का झुंड आबादी वाले क्षेत्र के तरफ प्यास बुझाने के लिए रात व दोपहर के शांत समय मे आते दिखाई पड़ने लगे है।महीने भर बढ़ी तेज धूप व तपन की वजह से कही भी जल संचय के संसाधनों में जल नहीं बचा है। क्षेत्र के खर्गसेनपुर, टंडवा, बांसबारी, बेहड़ा, भीतरी गांवों में कुल मिलाकर छह चेक डैम बने हुए हैं। आस-पास के सभी गांवों में सरकारी तालाब भी खुदवाए गए हैं।जिसमें से किसी भी चेकडैम व तालाब में पानी नहीं है। 

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