हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी दुष्कर्म में विवेचना न होने पर थानाध्यक्ष व विवेचक से जवाब तलब
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सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों पर एवं कानून का उल्लंघन करने वाले थानाध्यक्ष पर थाने पर दर्ज हुआ है मुकदमा
जौनपुर। पुलिस तो प्रभावी लोगों के मामले में वैसे ही कार्यवाही नहीं करती और जहां थानाध्यक्ष पर भी मुकदमा दर्ज हो वहां तो कार्यवाही का प्रश्न ही नहीं उठता भले ही हाईकोर्ट का आदेश ही क्यों न हो।मामला बदलापुर थाना क्षेत्र के सामूहिक दुष्कर्म का है। जिसमें हाईकोर्ट ने एसपी को अपनी निगरानी में निष्पक्ष विवेचना का आदेश दिया था 1 वर्ष बाद भी आदेश का अनुपालन न होने पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने थानाध्यक्ष पर तल्ख टिप्पणी कर विवेचक को आदेश दिया कि अब तक की गई विवेचना के संबंध में न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें। विवाहिता से 8 जून 2018 को हुए हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 17 जुलाई 2018 को कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों पर एवं प्रावधानों की अवहेलना पर थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का प्रभारी थानाध्यक्ष बदलापुर को आदेश दिया।मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन थानाध्यक्ष के भी मुल्जिम होने के कारण विवेचना नहीं की जा रही थी। जब वादिनी के साथ दुष्कर्म हुआ था उस समय भी आरोपियों के अनुचित दबाव में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था।विवेचना न होने पर वादिनी ने हाईकोर्ट की शरण लिया।हाईकोर्ट ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक को अपनी निगरानी में निष्पक्ष विवेचना कराने का आदेश दिया।सीजेएम ने 22 फरवरी 2019 को पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन थानाध्यक्ष से कराएं।एक वर्ष बीतने के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हुआ।जिस पर वादिनी ने पुनः कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।कोर्ट ने थानाध्यक्ष पर सख्त टिप्पणी की एवं विवेचक को केस डायरी के साथ उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
जौनपुर। पुलिस तो प्रभावी लोगों के मामले में वैसे ही कार्यवाही नहीं करती और जहां थानाध्यक्ष पर भी मुकदमा दर्ज हो वहां तो कार्यवाही का प्रश्न ही नहीं उठता भले ही हाईकोर्ट का आदेश ही क्यों न हो।मामला बदलापुर थाना क्षेत्र के सामूहिक दुष्कर्म का है। जिसमें हाईकोर्ट ने एसपी को अपनी निगरानी में निष्पक्ष विवेचना का आदेश दिया था 1 वर्ष बाद भी आदेश का अनुपालन न होने पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने थानाध्यक्ष पर तल्ख टिप्पणी कर विवेचक को आदेश दिया कि अब तक की गई विवेचना के संबंध में न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें। विवाहिता से 8 जून 2018 को हुए हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 17 जुलाई 2018 को कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों पर एवं प्रावधानों की अवहेलना पर थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का प्रभारी थानाध्यक्ष बदलापुर को आदेश दिया।मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन थानाध्यक्ष के भी मुल्जिम होने के कारण विवेचना नहीं की जा रही थी। जब वादिनी के साथ दुष्कर्म हुआ था उस समय भी आरोपियों के अनुचित दबाव में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था।विवेचना न होने पर वादिनी ने हाईकोर्ट की शरण लिया।हाईकोर्ट ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक को अपनी निगरानी में निष्पक्ष विवेचना कराने का आदेश दिया।सीजेएम ने 22 फरवरी 2019 को पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन थानाध्यक्ष से कराएं।एक वर्ष बीतने के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हुआ।जिस पर वादिनी ने पुनः कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।कोर्ट ने थानाध्यक्ष पर सख्त टिप्पणी की एवं विवेचक को केस डायरी के साथ उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।

