कुलपति को लगा करारा झटका
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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय पुस्तकालय सहायक के खिलाफ कुलपति द्वारा जारी आदेश को उच्च न्यायालय ने स्थगित कर दिया। इसके अनुपालन में कुलसचिव ने उसे सोमवार को सवेतन बहाल कर दिया है। महिला प्रशिक्षु के छेड़खानी के आरोप उन्हें निलंबित कर दिया था।
गत नौ सितंबर 2019 को एक पुस्तकालय प्रशिक्षु ने उनपर छेड़खानी का आरोप लगाया था। उसी दिन कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने आरोपित को निलंबित कर दिया था। आरोपों की जांच को एक पांच सदस्यीय समिति विज्ञान संकाय की प्रोफ़ेसर वंदना राय के नेतृत्व में गठित थी। जांच के दौरान साक्ष्यों के अभाव में समिति ने आरोपित को निर्दोष बताते हुए रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंप दी। इसके बाद कुलपति प्रो.राजाराम यादव ने 25 सितंबर 2019 को पुस्तकालय सहायक पर 10 हजार रुपये अर्थदंड और चेतावनी भरा पत्र दिया। इसके बाद वह न्यायालय गया। जहां से उच्च न्यायालय ने कुलपति के दोनों आदेशों को स्थगित करते हुए विश्वविद्यालय को सवेतन बहाल करने का आदेश दिया। काफी दिनों तक आदेशों का पालन नहीं किया गया। सोमवार को कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए पुस्तकालय सहायक को सवेतन बहाल कर दिया।
गत नौ सितंबर 2019 को एक पुस्तकालय प्रशिक्षु ने उनपर छेड़खानी का आरोप लगाया था। उसी दिन कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने आरोपित को निलंबित कर दिया था। आरोपों की जांच को एक पांच सदस्यीय समिति विज्ञान संकाय की प्रोफ़ेसर वंदना राय के नेतृत्व में गठित थी। जांच के दौरान साक्ष्यों के अभाव में समिति ने आरोपित को निर्दोष बताते हुए रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंप दी। इसके बाद कुलपति प्रो.राजाराम यादव ने 25 सितंबर 2019 को पुस्तकालय सहायक पर 10 हजार रुपये अर्थदंड और चेतावनी भरा पत्र दिया। इसके बाद वह न्यायालय गया। जहां से उच्च न्यायालय ने कुलपति के दोनों आदेशों को स्थगित करते हुए विश्वविद्यालय को सवेतन बहाल करने का आदेश दिया। काफी दिनों तक आदेशों का पालन नहीं किया गया। सोमवार को कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए पुस्तकालय सहायक को सवेतन बहाल कर दिया।

