गोल्ड मेडल लिस्ट में नाम न होने पर विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने की राज्यपाल से शिकायत

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने इस वर्ष होने वाले दीक्षांत समारोह में छात्रों को मिलने वाले गोल्ड मेडल पर सवालियां निशान लगायी है। उसने कुलपति से लेकर राज्यपाल तक शिकायत की है कि सीजीपीए की तहत मैने अपने विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त किया है। यह गोल्ड मेडल मुझे न देकर तीसरे स्थान पर रही छात्रों को दिया जायेगा। 

उधर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रा के आरोपों के एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय क्यूमूलेटिव ग्रेड पाइंट्स एवरेज (सीजीपीए) नही बल्की अपने अपने विषयों में सर्वोच्च अंक पाने वाले विद्यार्थियों को देता है। नियम के अनुसार ही इस बार भी मेधावी छात्रों को मेडल देने के लिए चयनित किया गया है।  


पूर्वांचल विश्वविद्यालय के रज्जू भैया संस्थान में परास्नातक भौतिक विज्ञान की छात्रा कुमारी शिवांगी मिश्रा ने कुलपति, राज्यपाल उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर शिकायत की है कि मैने अपने विषय में वर्ष 2024 में सीजीपीए में कुल 8.306 अंको के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है जबकि 18 सितम्बर 2024 को होने वाले 28वें दीक्षांत समारोह के लिए जारी गोल्डमेडलिस्ट की लिस्ट में मेरे विषय में तीसरे स्थान पर रही रश्मि मौर्या का नाम है। प्रदेश की कई विश्वविद्यालयों में सीजीपीए के अंको अधार पर गोल्ड मेडल दिया गया है। 

इस मामले पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह और कुलपति के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. मनोज मिश्रा से बात किया गया तो उन्होने बताया कि विश्वविद्यायल शुरू से ही अपने विषय में सर्वोच्च अंक पाने वाले छात्रों की गोल्ड मेडल देता है। संचयी ग्रेड बिंदू औसत (सीजीपीए ) के तहत नही दिया जाता है। 

परास्नातक भौतिक विज्ञान की छात्रा कुमारी शिवांगी मिश्रा को कुल 1782 अंक जबकि रश्मि मौर्या ने 1812 अंक प्राप्त किया है। 




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