यमदग्नि ऋषि की तपो स्थली पुनः बनने जा रही है रमणीय स्थल
अखण्ड माता के मंदिर की होगी प्रदेश में अलग पहचान
सुधाकर शुक्ला पत्रकार
जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित जमैथा गांव में गोमती नदी के पावन तट पर यमदग्नि ऋषि की तपो स्थली है जहां पर उनकी पत्नी अखण्ड माता का प्राचीन मंदिर स्थापित है। माता का आर्शीवाद लेने के लिए पूरे पूर्वांचल से श्रध्दालु यहां आते है। यह पावन स्थल काफी दिनों से उपेक्षित था। क्षेत्रीय विधायक ने यहां की विशेषता से शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया। योगी सरकार ने तत्काल इस स्थल को सजाने सवारने का फरमान जारी किया। आदेश मिलते ही पर्यटन विभाग ने 25 लाख रूपये स्वीकृत कर दिया उधर विधायक जगदीश नारायण राय ने अपने निधि से 25 लाख रूपये दिया। कार्यदायी संस्था ने इस उपवन को सजाने सवारने का काम शुरू किया पहले मुख्य मार्ग पर भव्य द्वार, गेट से मंदिर तक इण्टर लॉकिग , मंदिर परिसर के चारो तरफ बाउण्ड्रीवाल, शौचालय निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है।
उधर स्थानीय जनता ने भी अपने गांव की पहचान को आधुनिक बनाने का निर्णय लिया। जन सहयोग से अखण्ड माता के मंदिर का पुनः निर्माण कार्य शुरू कर दिया। माता के दरबार को भब्य बनाने के लिए राजस्थान के पत्थर से मंदिर को बनाया जा रहा है। कारीगर पत्थर को तरासकर सुन्दर और कलात्मक तरीके से मंदिर बना रहे है। अभी तक हुए कार्यो को देखकर लगता है आने वाले कुछ महीने में यह मंदिर बनकर तैयार हो जायेगी जो पूर्वांचल ही नही बल्की प्रदेश अपना एक अलग पहचान बनायेगी।



