यह शख्स कभी लगाता था दरवाजे-दरवाजे टेंट कनात, आज है दो आलीशान मैरेज हाल का मालिक
जो कभी कहते थे ठाकुर होकर करते हो यह छोटा काम, आज वही ठोक रहे है पीठ
बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणादायक है राकेश सिंह की संघर्ष भरी दास्तां
सुक्खू सिंह का सपना था बास्केट बॉल का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का, लेकिन कुदरत खेलाया सॉप सीढ़ी का खेल
लज्जा छोड़ो, करो कुछ अपना ईमानदारी से काम, अवश्य मिलेगा मुकाम: राकेश सिंह
जौनपुर। जिन्दगी की कठिन डगर, पग पग पर ठोकरे और समय समय पर धोखा मिलने के बाद भी इस शख्स ने अपना पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर ही रखा। रास्ते में ठोकरों से मिले जख्मों को े अपना हथियार बनाया तो धोखों से अपने इरादे को और मजबूत किया जिसका परिणाम है कि कभी दरवाजे-दरवाजे टेंट कनात लगाने वाला युवक आज दो आलीशान मैरेज हाल का मालिक बन गया है।
इस बीच उसकी जिन्दगी में लूडो गेम की सॉप सीढ़ी वाला खेल भी आया , कभी धंधे की ऊंचाई पर पहुंचा तो कभी अचानक आयी सर्प रूपी परेशानियों के चलते अर्श से फर्श पर आना पड़ा। तमाम परेशानियों को झेलने के बाद भी वह हिम्मत हारने के बजाय उसने हालात से लड़ते हुए अपने लक्ष्य को भेदने का प्रयास करता रहा।
कारोबार में नफा नुक्सान होता रहा लेकिन इसका असर उसने अपने बच्चो की पढ़ाई पर नही पड़ने दिया जिसका परिणाम है कि इस वर्ष उसकी बेटी नीट परीक्षा में अच्छा लाकर सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिल हो गयी है।
आज हम बात कर रहे है नगर के भूपतिपट्टी गांव के निवासी व तिलक प्लेस टीडी कालेज और तिलक महल मैरेज हाल नेवादा के मालिक राकेश सिंह सुक्खू की।
सुक्खू सिंह पढ़ाई लिखाई के साथ बास्केट बॉल खेलते है। उन्होने कई बार अतंर महाविद्यालयी और विश्वविद्यालयी टूमेंट में अच्छा प्रर्दशन करते हुए अपनी टीम को जीत दिलाया। 1997 में लखनऊ एक मैच में सुक्खू की खेल को देखते हुए ओएनजीसी के कोच ने उनका सलेक्शन कर लिया। उनकी शर्त थी कि राकेश सिंह देहरादून में ओएनजीसी के स्टेडियम में छह माह प्रैक्टिस करें लेकिन घर की माली हालत ठीक न होने केे कारण वे नही जा सके। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होने राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का सपना तोड़कर रोजगार करने का मन बनाया।
सूक्खू ने जब अपना करोबार सम्भाला था उनके हाथ में फूटी कौड़ी नही थी, दोस्तों से पैसा उधार लेकर टेंट हाऊस का व्यापार शुरू किया खुद मेहनत करके व्यापार को सवारा और सजाया।
कुछ पैसा हाथ में आने के बाद उसने टीडी कालेज का बंद पड़े एक हास्टल को लिज पर लेकर तिलक प्लेस नाम से मैरेज हाल खोला।
यह कारोबार चलने के बाद राकेश सिंह की माली हालत काफी मजबूत हो गयी। उसके बाद उन्होने टीडी डिग्री का पीली कोठी में बंद पड़े एक खण्डहर नुमा विल्डिंग को भी कांट्रैक्ट पर लिया। यह भवन काफी जर्जर हो गया था। उसे लाखों रूपये खर्च करके बनवाया। इसके बनवाने में कमाई से अर्जित किया सारा पैसा लगाया ही साथ में दोस्तों से भी सहयोग लिया। यह मैरेज हाल बनकर तैयार होने के बाद कुछ ही महीने चला था इसी बीच हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनो मैरेज हाल पर ताला लग गया। अचानक करोबार ठप होने से राकेश सिंह धरातल पर आ गये। उनके सामने अंधेरा सा छा गया। एक तरफ धंधा बंद दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई लिखाई और दवाई का जिम्मा था, उधर जिन लोगों से उन्होने कर्ज ले रखा था उनका तगादा आना भी शुरू हो गया। आप अंदाजा लगा सकते है उस वख्त राकेश सिंह के हालात कैसे रहेगें होगें। इसके बाद भी इस शख्स ने हिम्मत नही हारा। भगवान के सहारो पुनः प्रयास करना शुरू किया। ईश्वर का आर्शीवाद मिला तो उन्हे वाराणसी-लखनऊ हाईवे पर नेवादा गांव में एक जमीन लिज पर मिल गयी। उन्होने कर्ज लेकर इस जमीन पर आलीशान मैरेज हाल बनवाया यह मैरेज हाल चलने लगा। कुछ दिन बाद भगवान की एक कृपा राकेश पर हुई तो हाईकोर्ट का फैसला राकेश सिंह पक्ष में आने के बाद तिलक प्लेस टीडी कालेज का पुनः संचालन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे राकेश सिंह पुनः अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे है।
शिराज ए हिन्द डॉट कॉम से खास बातचीत में राकेश सिंह ने बताया कि जब मैने रोजगार शुरू किया हमारे जाति विरादरी के लोग ताना मारते थे कि ठाकुर होकर टेंट का काम कर रहे हो लेकिन आज वही लोग मेरी पीठ ठोक रहे है।
हमारे इस सफर में कई करीबी दोस्त और शुभचिंतक हर समय डटकर खड़े रहे जिसके कारण आज मै खड़ा हूं लेकिन इसी में कुछ लोग ऐसे भी थे जो सामने से हमारे साथ थे लेकिन पीठ पीछे छुरा लेकर खड़े रहे लेकिन ईश्वर की कृपा रही कि उन्हे कोई मौका नही मिला।
राकेश सिंह बेरोजगार युवाओं से अपील किया कि वे लोग लज्जा छोड़कर कोई भी अपना रोजगार करें , कोई काम छोटा बड़ा नही होता है बस करने का तरीका अलग अलग होता है। जिस दिन आप लोग पूरी ईमानदारी के साथ अपना व्यवसाय शुरू करेगें तो सफलता अवश्य मिलेगीं।




Sowabhao k dhani time k pakke aadmi Hain sukkhu bhayya
जवाब देंहटाएंHamare senior bhi hain
Ground ka rishta ab to nahi Raha lakin kabhi milte Hain to aadab me kami nahi ho pati
Salam hai sukkhu bhayya ko
सराहनीय संघर्ष
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