देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिक की पत्नी आज अपने ही हक के लिए दर-दर भटक रही है
कारगिल शहीद की पत्नी जमीन के लिए न्याय की लगा रही गुहार
जौनपुर: देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिक की विधवा पत्नी आज अपने ही गांव में अन्याय और अत्याचार का सामना कर रही है। मामला तहसील शाहगंज के ग्राम गौसपुर का है, जहाँ शहीद गनर महेन्द्र प्रताप (सेवा संख्या 14416321), जो भारतीय सेना की तोपखाना रेजीमेंट में कार्यरत थे, 8 दिसंबर 1998 को आतंकियों से लोहा लेते हुए कारगिल में शहीद हो गए थे।
उनकी पत्नी रीता यादव, जो अब अकेली जीवन बिता रही हैं, आज जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए अपने पड़ोसियों द्वारा लगातार प्रताड़ित की जा रही हैं। पड़ोसियों द्वारा शहीद की विधवा की जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। जब रीता देवी इस पर बात करना चाहती हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है, झगड़ा किया जाता है और अपमानित किया जाता है।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने बीते 05 मई को जिलाधिकारी जौनपुर को एक प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक ओर जहां सरकार शहीदों के बलिदान को याद कर श्रद्धांजलि देती है, वहीं दूसरी ओर उनकी विधवा पत्नी को अपनी जमीन के लिए भी प्रशासन से सहयोग नहीं मिल रहा।
रीता देवी ने सोमवार को एक बार फिर से डीएम से मिलकर अपील की है कि उन्हें उनका हक दिलाया जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही हो, ताकि भविष्य में कोई और शहीद परिवार ऐसे अपमान और पीड़ा से न गुज़रे।

