जानिए नौ विधानसभाओं में कितने लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे, एक लाख से अधिक मृत पाए गए
एसआईआर के बाद जौनपुर में बड़ा खुलासा
जौनपुर। जनपद में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2026 के आलेख्य प्रकाशन में जौनपुर की नौ विधानसभा सीटों में कुल 5 लाख 89 हजार 543 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इनमें एक लाख से अधिक मतदाता मृत पाए गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित, अनुपस्थित अथवा पहले से अन्यत्र पंजीकृत मिले।
एसआईआर से पूर्व जनपद में कुल मतदाताओं की संख्या 35 लाख 70 हजार 851 थी, जो 06 जनवरी 2026 को जारी आलेख्य मतदाता सूची में घटकर 29 लाख 81 हजार 308 रह गई। इस तरह कुल 16.51 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हो गए।
मृत्यु के कारण कटे 1.03 लाख से अधिक नाम
आंकड़ों के अनुसार नौ विधानसभाओं में 1,03,124 मतदाता मृत पाए गए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए। वहीं 1,34,654 मतदाता अनुपस्थित/पता न चलने योग्य, 2,68,275 मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित, 72,761 मतदाता पहले से अन्यत्र पंजीकृत तथा 10,724 अन्य कारणों से सूची से बाहर हुए।
जौनपुर सदर में सबसे ज्यादा नाम कटे
विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो—
जौनपुर सदर में सर्वाधिक 1,04,501 नाम (23.21%) कटे
जफराबाद में 71,463 नाम (17.82%)
मछलीशहर में 64,942 नाम (15.89%)
मुंगरा बादशाहपुर में 61,117 नाम (15.62%)
शाहगंज में 61,014 नाम (14.80%)
मल्हनी में 59,341 नाम (15.44%)
केराकत में 63,825 नाम (15.05%)
बदलापुर में 50,654 नाम (14.41%)
मड़ियाहूं में 52,686 नाम (15.17%) हटाए गए।
मृत मतदाताओं की संख्या भी चिंता का विषय
केवल जौनपुर सदर विधानसभा में 12,665, शाहगंज में 11,870, बदलापुर में 10,010, मल्हनी में 10,955 तथा केराकत में 10,061 मृत मतदाता पाए गए। यह दर्शाता है कि वर्षों से सूची में मृतकों के नाम दर्ज थे, जिससे चुनावी शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे थे।
जिला निर्वाचन प्रशासन के अनुसार विशेष पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है। बीएलओ द्वारा घर-घर सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए, जो या तो मृत थे, या वर्षों से क्षेत्र में निवास नहीं कर रहे थे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 06 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से कट गया है तो वह फॉर्म-6 या फॉर्म-8 के माध्यम से नाम जुड़वा या संशोधित करा सकता है।
एक तरफ जहां यह कार्रवाई लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, वहीं इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।

