सरेराह रॉड-डंडों से हुआ हमला, दो युवक लहूलुहान
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खेतासराय में बेलगाम अपराध, एक के बाद एक वारदात से दहशत
खेतासराय, जौनपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र में अपराध पूरी तरह बेलगाम होता नजर आ रहा है। चोरी, मारपीट और रहस्यमय मौतों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। हालात ऐसे हैं कि आम लोग घर से निकलने में भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ताजा मामला मंगलवार सुबह का है, जब सरेराह दबंगों ने दो युवकों पर जानलेवा हमला कर इलाके में सनसनी फैला दी। मंगलवार की सुबह करीब 9:30 बजे तरसावा गांव निवासी प्रवीण कुमार राजभर उर्फ मोनू (35) पुत्र सिधारी राजभर अपने साथी राहुल राजभर (27) पुत्र लौटन राम राजभर को पीलिया की दवा पिलाने के लिए पारा कमाल जा रहे थे। जैसे ही दोनों युवक लुंबिनी-दुद्धी राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर मनेछा मोड़ के पास पहुंचे, तभी पीछे से एक बाइक पर सवार तीन दबंग युवकों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि बिना किसी विवाद के हमलावरों ने रॉड, सरिया और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दोनों को लहूलुहान कर दिया। अचानक हुए इस हमले से सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर राहगीर मौके पर जुटने लगे। लोगों को आता देख हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही डायल 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोंधी ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। गौरतलब है कि खेतासराय थाना क्षेत्र में यह कोई पहली घटना नहीं है। नदौली गांव में चोरी की घटना और बर्जी गांव में डॉक्टर सुनील राजभर की संदिग्ध मौत हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी हुई है, जिसका अब तक खुलासा नहीं हो सका। इसके बाद जमदहा नाले में अज्ञात शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। वहीं कुछ दिन पूर्व खेतासराय कस्बे में ही एक टाइल्स व्यवसाई को दुकान बंद कर घर लौटते समय नौली क्षेत्र में बाइक सवार बदमाशों ने मारपीट कर मरणासन्न कर दिया था लेकिन उस मामले में भी पुलिस आज तक खाली हाथ है। लगातार हो रही इन घटनाओं से क्षेत्रीय लोगों में भय और आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है। स्थानीय नागरिकों ने रात्रि और दिवस गश्त बढ़ाने तथा अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक अपराधी यूं ही सरेराह कानून को चुनौती देते रहेंगे?

