मौत के मुंह से लौटाई जिंदगी: डॉ. सिद्धार्थ बने खुशबू के लिए जीवनरक्षक फरिश्ता
जौनपुर। चिकित्सा सेवा को जब संवेदना, अनुभव और तत्परता का साथ मिल जाए, तो असंभव भी संभव हो जाता है। ऐसा ही उदाहरण पेश किया वाजिदपुर स्थित सिद्धार्थ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. लाल बहादुर सिद्धार्थ ने, जिन्होंने गंभीर रूप से घायल किशोरी की जान बचाकर मानवता की मिसाल कायम की।
बक्शा ब्लॉक के खरौना गांव की 17–18 वर्षीय खुशबू यादव मोबाइल गेम को लेकर हुए पारिवारिक विवाद के बाद आत्मघाती कदम उठा बैठी। गले की श्वास नली पूरी तरह और भोजन नली आंशिक रूप से कट जाने से उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी। परिजन आनन-फानन में उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
युवती की स्थिति देखकर चिकित्सकीय दृष्टि से उसे हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी गई, लेकिन परिजनों के आग्रह पर डॉ. सिद्धार्थ ने जोखिम उठाते हुए तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। बिना समय गंवाए मरीज को ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया। करीब दो घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में डॉ. सिद्धार्थ और उनकी टीम ने श्वास नली व भोजन नली को सफलतापूर्वक जोड़ दिया।
ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, लेकिन डॉक्टर की सूझबूझ, अनुभव और निरंतर प्रयासों से खुशबू को नई जिंदगी मिल सकी। वर्तमान में युवती की हालत स्थिर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है।
अपनी बेटी की जान बचते देख भावुक परिजन डॉ. लाल बहादुर सिद्धार्थ को भगवान का दूसरा रूप बताते हुए उनका आभार जता रहे हैं। यह घटना न केवल मोबाइल की लत पर चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सच्ची चिकित्सा सेवा आज भी इंसानियत की सबसे बड़ी ताकत है।

