अधिवक्ताओं के लिए टोल प्लाजा हो फ्री, ताकि न्याय की राह में कोई रुकावट न रहे :विकास तिवारी
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टोल प्लाजा पर अधिवक्ता के साथ हुए मारपीट के मामले में कार्यवाही की मांग
जौनपुर । बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र में स्थित बारा/गोतौना टोल प्लाजा पर 14 जनवरी 2026 को लखनऊ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला के साथ टोल कर्मचारियों द्वारा की गई बर्बर मारपीट की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना की निंदा करते हुए दीवानी न्यायालय जौनपुर के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता विकास तिवारी की अगुआई में मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को जिलाधिकारी, जौनपुर के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है।
घटना के अनुसार, प्रतापगढ़ जिले के निवासी एवं लखनऊ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला लखनऊ न्यायालय जा रहे थे। लखनऊ-सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-731) पर स्थित बारा/गोतौना टोल प्लाजा पर उनके वाहन का फासटैग बैलेंस समाप्त होने पर उन्होंने टोल कर्मचारियों से नकद भुगतान कर रसीद काटने का अनुरोध किया। यह एक सामान्य एवं वैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन टोल कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें घेर लिया, दौड़ाकर बेरहमी से पीटा। मारपीट के दौरान वे घायल होकर बेहोश हो गए। आरोप है कि टोल कर्मचारियों ने उनकी अंगूठी, सोने की चेन एवं पर्स भी छीन लिया।इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें टोल कर्मचारियों की गुंडागर्दी साफ नजर आ रही है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर तीन टोल कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अधिवक्ता समुदाय में भारी आक्रोश है।
अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि यह घटना न केवल एक अधिवक्ता के साथ हिंसा है, बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय की गरिमा, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा पर गहरा आघात है। जौनपुर के अधिवक्ता नियमित रूप से इस राजमार्ग का उपयोग लखनऊ उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायिक कार्यों के लिए करते हैं। हमारे जनपद मे भी टोल प्लाजा सरकोनी ,मछलीशहर ,पवारा पर अराजकता सोच तथा आपराधिक प्रवृत्ति वाले टोलकर्मी रहते हैं जो भय का वातावरण बनाये रखते हैं। ऐसी घटनाएं हमारी सुरक्षा को खतरे में डालती हैं और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती हैं। टोल प्लाजाएं सार्वजनिक सुविधा के लिए हैं, न कि गुंडागर्दी के अड्डे।
जौनपुर दीवानी न्यायालय के अधिवक्ताओं ने मांग रखी हैं कि प्रकरण की उच्च स्तरीय सीबीआई स्तर की जांच कराई जाए तथा सभी दोषी टोल कर्मचारियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोर सजा दी जाए, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए जैसी धाराओं का प्रयोग भी हो। टोल प्लाजा प्रबंधक एवं संचालक कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, जिसमें लाइसेंस निलंबन/रद्दीकरण शामिल हो।एनएचएआई को निर्देश दिए जाएं कि टोल कर्मचारियों की ट्रेनिंग एवं पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य हो।
प्रदेश के सभी टोल प्लाजाओं पर सीसीटीवी कैमरे, पुलिस चौकी एवं हेल्पलाइन स्थापित की जाए। अधिवक्ताओं के लिए विशेष पास या छूट की व्यवस्था किया जाय।पीड़ित अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला को उचित क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए एवं उनके छीने गए सामान की बरामदगी सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो यह कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है और प्रदेशव्यापी आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।तथा उनके द्वारा मुख्यमंत्री एवं जनपद प्रशासन से अपील किया गया है कि इस गंभीर मामले को प्राथमिकता पर लिया जाय।
उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से आशीष शुक्ल, रोहित पाठक, रजनीश शुक्ल, शशांक शेखर तिवारी, भैयालाल यादव, सुरज सोनी, कुलदीप यादव, विशाल मिश्रा,अंकित यादव, रंजीत यादव,अनिल मिश्रा ,देवेश मौर्य आदि उपस्थित रहे।
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