टीईटी की तलवार से भड़के शिक्षक, 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर महाधरना
ज्ञापन में कहा गया कि जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने निर्धारित अर्हताओं को पूर्ण करते हुए विधिवत नियुक्ति प्राप्त की थी। किंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने से शिक्षकों में गहरी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
संगठनों ने मांग की कि सरकार आरटीई एक्ट 2017 के संशोधन को निरस्त करते हुए अध्यादेश लाकर वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करे। साथ ही सरकार शिक्षकों का पक्ष माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मजबूती से रखे तथा एनसीटीई के माध्यम से इस आशय का हलफनामा दाखिल कर देशभर के लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे।
आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि 22 फरवरी को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक ट्विटर महाअभियान चलाया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 26 फरवरी 2026 को दोपहर 1 बजे से समस्त शिक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देंगे। इसके बाद बीएसए कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा।
ज्ञापन देने वालों में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद शुक्ला, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. अतुल प्रकाश यादव, विशेष बीटीसी संघ के जिलाध्यक्ष राममूरत यादव, यूटा के जिलाध्यक्ष डॉ. हेमंत सिंह सहित अन्य शिक्षक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

