उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ ने आरटीई आवेदनों के पुनर्विचार की उठाई मांग
जौनपुर। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ ने नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) के तहत अल्पसंख्यक, दुर्बल वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के प्रवेश संबंधी आवेदनों के निरस्तीकरण पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। संघ के प्रदेश संगठन मंत्री सुशील सिन्हा द्वारा महानिदेशक, स्कूल शिक्षा को प्रेषित पत्र में प्रथम चरण में निरस्त किए गए आवेदनों की समीक्षा कर पात्र बच्चों को प्रवेश दिलाने का अनुरोध किया गया है।
जौनपुर जिलाउपाध्यक्ष पवन श्रीवास्तव ने बताया कि पत्र में उल्लेख है कि आरटीई पोर्टल पर प्रदेशभर में लगभग 2.61 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। कई स्थानों पर विद्यालय संचालन, पोर्टल त्रुटि या निवास संबंधी तकनीकी कारणों से 30 से 50 प्रतिशत तक आवेदन निरस्त कर दिए गए, जिससे अभिभावकों में निराशा है।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रमिक एवं कामकाजी परिवार रोजगार के कारण अपने मूल निवास से अलग स्थानों पर रहते हैं। ऐसे में बच्चों को स्थानीय स्तर पर प्रवेश देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। संघ ने मांग की है कि द्वितीय एवं तृतीय चरण में निरस्त आवेदनों का पुनर्विचार कर पात्र अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में अतिरिक्त सीटें चिन्हित की जाएं।
पवन श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, इसलिए तकनीकी कारणों से किसी भी पात्र बच्चे को वंचित न रखा जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को आरटीई का लाभ मिल सके।


बहुत सुन्दर
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