बरसठी बाजार में गूंजे नवगीत, कवियों की रचनाओं से सजा नवगीत दिवस
उल्लेखनीय है कि नवगीतों का प्रामाणिक संकलन ‘गीतांगिनी’ 5 फ़रवरी 1958 को प्रकाशित हुआ था, जिसके संपादक स्मृतिशेष राजेन्द्र प्रसाद सिंह थे। इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए नवगीत कुटुंब के संचालक एवं वरिष्ठ नवगीत कवि शिवानंद सिंह ‘सहयोगी’ की पहल पर 5 फ़रवरी को नवगीत दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कवि-गोष्ठी की अध्यक्षता संगम साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान के मुख्य सचिव योगेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव ने की। ओज कवि डॉ. संदीप कुमार ‘बालाजी’ ने अपने नवगीत का प्रभावशाली पाठ किया। गीत कवि अरुण कुमार यादव ‘आदित्य’ ने ‘हीरा-मोती संग किसान’ गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं। वरिष्ठ ग़ज़लकार अजय विश्वकर्मा ‘शान’ ने भी अपनी रचना से श्रोताओं को प्रभावित किया।
नवगीत कवि योगेन्द्र प्रताप मौर्य ने नवगीत और उसके समकालीन सामाजिक यथार्थ पर विस्तार से चर्चा की। वहीं श्री प्रदीप कुमार ने पारंपरिक गीत और नवगीत के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए विभिन्न नवगीत संग्रहों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप कुमार ‘बालाजी’ ने किया तथा विकास जी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उमाशंकर पटेल, शैलेन्द्र कुमार सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

