CTET की कसौटी पर गुरुजी, ठंड में भी पसीना छुड़ा गई परीक्षा
जौनपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के बाद अब केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) शिक्षकों के लिए एक नई और कठिन अग्निपरीक्षा बनती जा रही है। शनिवार को आयोजित CTET परीक्षा में शामिल होने पहुंचे अध्यापकों के चेहरों पर चिंता, तनाव और असमंजस साफ दिखाई दिया। कड़ाके की ठंड के बीच परीक्षा केंद्रों पर बैठे गुरुजी सवालों से जूझते नजर आए और ठंड के बावजूद पसीने की बूंदें माथे पर छलक आईं।
ठंड में छूटा पसीना, समय से हारी तैयारी
परीक्षा में शामिल अध्यापक अरविंद कुमार ने बताया कि इस बार का प्रश्नपत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। समय प्रबंधन सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए भी TET और अब CTET की अनिवार्यता ने मानसिक दबाव कई गुना बढ़ा दिया है। खासकर शिक्षण विधि और बाल मनोविज्ञान से जुड़े प्रश्नों ने परीक्षार्थियों की गहरी समझ और सोच की असली परीक्षा ले ली।
अनुभव भी आया कसौटी पर
परीक्षा देने पहुंचे अध्यापक श्यामलकांत ने कहा कि प्रश्नपत्र देखते ही स्पष्ट हो गया कि रटंत ज्ञान के दिन अब बीत चुके हैं। अधिकतर प्रश्न अवधारणा आधारित थे और विकल्प इतने नजदीक थे कि सही उत्तर चुनना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि वर्षों से कक्षा में पढ़ाने के अनुभव के बावजूद खुद परीक्षा कक्ष में बैठकर स्वयं को परखना बेहद कठिन अनुभव रहा।
सवालों में उलझे गुरुजी, घड़ी बनी सबसे बड़ी दुश्मन
अध्यापक उमेश चंद्र ने बताया कि ठंड काफी थी, लेकिन परीक्षा का दबाव इतना अधिक था कि समय का एहसास ही नहीं रहा। कई प्रश्न सोच-समझकर हल करने के बावजूद अधूरे रह गए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए परीक्षा आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही परीक्षा पैटर्न और तैयारी को लेकर स्पष्ट मार्गदर्शन भी उतना ही जरूरी है।
शिक्षा सुधार की मंशा, शिक्षकों पर बढ़ता दबाव
परीक्षा केंद्रों के बाहर भी अभ्यर्थियों के बीच इसी विषय को लेकर चर्चाएं होती रहीं। शिक्षकों का मानना है कि TET और CTET जैसी परीक्षाएं शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में जरूरी कदम हैं, लेकिन पहले से सेवा में कार्यरत अध्यापकों के लिए यह अतिरिक्त मानसिक तनाव और चिंता का कारण बनती जा रही हैं।

