सीमा पर देश की रक्षा, गांव में बदहाली: सैनिक बाहुल्य बीरमपुर मूलभूत सुविधाओं से वंचित
जौनपुर। एक ओर जहां सैनिक देश की सीमाओं पर डटकर राष्ट्र की रक्षा कर रहे हैं, वहीं उनका अपना गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बदहाली झेल रहा है। खुटहन क्षेत्र का सैनिक बाहुल्य गांव बीरमपुर आज भी सड़क और प्रशासनिक व्यवस्था जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहा है। गांव की इसी पीड़ा को लेकर अवकाशप्राप्त मानद कैप्टन अशोक उपाध्याय ने जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र से मिलकर ज्ञापन सौंपा और समस्याओं के समाधान की मांग की।
जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में उन्होंने बताया कि बीरमपुर गांव में लगभग 25 वर्ष पहले चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन विगत वर्ष बिना पूरी हुए ही अभिलेख वापस तहसील को भेज दिए गए। इसके चलते भूमि संबंधी विवाद और विकास कार्यों में अड़चनें बनी हुई हैं। समुचित मार्गदर्शन और समन्वय के अभाव में ग्रामवासियों से जुड़े कई जरूरी काम अधर में लटके हुए हैं।
उन्होंने बताया कि गांव में आज तक पक्की सड़क का अभाव है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। सड़क न होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, विद्यालयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी दयनीय हो जाती है।
कैप्टन अशोक उपाध्याय ने बताया कि बीरमपुर गांव सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है, जहां करीब 50 से अधिक युवक भारतीय सेना, वायु सेना और अन्य सुरक्षा बलों में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। इसके बावजूद गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर शाहगंज क्षेत्र के विधायक रमेश सिंह अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं उनके ही विधानसभा क्षेत्र का यह गांव अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का गांव आज भी सड़क और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने कैप्टन अशोक उपाध्याय से ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों को मामले में तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस सैनिक बाहुल्य गांव की समस्याओं को गंभीरता से लेकर जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाएगा।

