उच्च दर्जे के गजलकार थे ओमप्रकाश मिश्र
पांचवीं पुण्यतिथि पर दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि
जौनपुर। नगर के हिंदी भवन में प्रगतिशील कवि, ग़ज़लकार, लेखक और रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र की पांचवीं पुण्यतिथि मनाई गई। अतिथियों ने पुष्प अर्पित करके श्री मिश्र के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मिश्र के ज्येष्ठ पुत्र और कार्यक्रम के संयोजक, चिकित्सक और कवि डॉ प्रतीक मिश्र ने अपने पिता की कविताओं, गीतों और ग़ज़लों का पाठ किया। श्रद्धांजलि के बाद आयोजित कविता गोष्ठी में हर्ष दूबे, राजेश पांडे, संजय सिंह सागर, प्रमोद वाचस्पति, आलम ग़ाज़ीपुरी, अहमद अज़ीज़, अमृत प्रकाश, लाल प्रकाश राही, डॉ आरके विश्वकर्मा, प्रतिमा मौर्य, प्रो धीरेन्द्र पटेल, विभा तिवारी और अहमद निसार ने अपनी रचनाओं के जरिए श्री मिश्र को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। मुख्य अतिथि विभा तिवारी ने ओमप्रकाश मिश्र को अपना प्रेरणा स्रोत बताया और अपनी यादों को साझा किया। वेंटिलेटर पर होने के बावजूद वे उनकी ग़ज़लों को सुनते और सराहते रहे। प्रो धोरेन्द्र पटेल ने कहा कि ओमप्रकाश मिश्र नए रचनाकारों को बड़े ध्यान से सुनते और सराहते थे। उनसे वे लगभग रोज ही मिलते थे और उस दौरान महत्वपूर्ण साहित्यिक चर्चायें होती थीं। अहमद निसार ने अध्यक्षीय उद्दबोधन में कहा कि श्री मिश्र से उनका रूह का रिश्ता रहा और वे लोग हिंदी भवन में प्रायः मिला करते थे।उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश मिश्र एक उच्च दर्जे के ग़ज़लकार थे और उनका निधन सभी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। संचालन प्रोफेसर धीरेंद्र पटेल ने किया। कार्यक्रम में आशा सिंह, रामजीत मिश्र, प्रशांत शुक्ल, मृदुल मिश्र , कुलदीप और अन्य लोगों की उपस्थिति रही। अंत में श्री मिश्र के कनिष्ठ पुत्र अनुभव मिश्र ने एक कविता के माध्यम से पिता को याद किया और सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

