आदि गंगा के पुनरुद्धार का संकल्प जे साथ जौनपुर पहुची 'गोमती जीवन यात्रा'
सूरज घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने किया हवन-पूजन
राम के चरणों से पावन हुई गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने का अभियान तेज
जौनपुर। आदि गंगा गोमती के अस्तित्व को बचाने और इसके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से निकली 'गोमती जीवन यात्रा' सोमवार को अपने 23वें पड़ाव पर जौनपुर नगर पहुँची। यूथ इन एक्शन इंडिया संस्था के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा का नगरवासियों ने जगह-जगह भव्य स्वागत किया। पचहटिया स्थित सूरज घाट और प्रतिमा विसर्जन घाट पर आयोजित विशेष अनुष्ठान में भारी संख्या में लोग जुटे।यज्ञ में आहुति देने के उपरांत पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह ने कहा कि नदियां हमारी जीवनरेखा हैं। गोमती का संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखने का संकल्प है। मठ के महंत श्री नरसिंह दास जी महाराज ने भी यात्रा की सफलता के लिए आशीर्वाद दिया और आहुति प्रदान की।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक चेतना का संगम
संस्था के राष्ट्रीय संयोजक शतरूद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान राम के वनगमन की साक्षी रही इस नदी को सहेजना हम सबका कर्तव्य है। अभियान से जुड़े सदस्यों ने बताया कि जहाँ शासन वैज्ञानिक स्तर पर कार्य कर रहा है, वहीं यह यात्रा आध्यात्मिक चेतना (यज्ञ) के माध्यम से जन-जन को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
यह यात्रा अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हुए 13 मार्च को कैथी (वाराणसी) पहुँचेगी, जहाँ गोमती का गंगा में संगम होता है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जयसिंह, अमित सिंह, पुनीत सेठ, सीटी, विकास सिंह और राजेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

