पत्रकार हत्याकांड के 22 माह बाद भी नहीं मिला शस्त्र लाइसेंस, पीड़ित परिवार ने डीएम से लगाई गुहार
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जौनपुर।जनपद में चर्चित पत्रकार हत्याकांड के 22 माह बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि मामले के सभी आरोपी जमानत पर जेल से रिहा हो चुके हैं, जबकि अपनी सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस मांग रहे परिवार की फाइलें अब भी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।
थाना शाहगंज क्षेत्र के सबरहद गांव निवासी पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद से ही परिवार दहशत में जी रहा है। मृतक के बड़े भाई संतोष श्रीवास्तव और उनके परिजनों ने अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस हेतु आवेदन किया था।
सोमवार को संतोष श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया था। संबंधित विभाग द्वारा जांच व निरीक्षण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई, लेकिन इसके बावजूद आज तक लाइसेंस जारी नहीं किया गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि फाइलें विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़ी हैं और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। इस वजह से परिवार को लगातार मानसिक तनाव और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
संतोष श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई जाए और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए, ताकि शस्त्र लाइसेंस जारी कर परिवार को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, जहां एक ओर गंभीर आपराधिक घटनाओं के पीड़ित सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी प्रक्रियाओं की धीमी रफ्तार उनके भरोसे को कमजोर कर रही है।

