टेट की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का विशाल मशाल जुलूस, सरकार के खिलाफ बुलंद हुए स्वर
जौनपुर। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के तत्वाधान में मंगलवार को टेट (TET) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने विशाल मशाल जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जताई। जुलूस बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेट स्थित शहीद स्मारक तक पहुंचा, जहां शिक्षकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को उठाया।
मशाल जुलूस में शामिल शिक्षक-शिक्षिकाओं ने “सेवा सुरक्षा कैसे पाई, संघर्षों से बलिदानों से”, “इसकी रक्षा कौन करेगा—हम करेंगे, हम करेंगे” तथा “नो टेट, आरटीई एक्ट लागू करो” जैसे नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। शिक्षकों ने टेट की अनिवार्यता को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की।
जुलूस का नेतृत्व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश सिंह ‘मुन्ना’, जिलाध्यक्ष संजय सिंह, अटेवा के जिलाध्यक्ष चंदन सिंह, युटा के जिलाध्यक्ष डॉ. हेमंत सिंह, पूर्व माध्यमिक विद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील उपाध्याय, विशिष्ट बीटीसी संघ के राममूरत यादव, पीएसपी के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह, मंत्री विकास सिंह, टीएससीटी के अरविंद यादव तथा शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष संदीप यादव ने किया।
इस दौरान प्रमुख शिक्षक नेता डॉ. विजय रघुवंशी, रुद्रसेन सिंह, काशी नंदन मिश्रा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं।
जुलूस के समापन पर शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि आगामी मानसून सत्र में लोकसभा में विधेयक लाकर टेट की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए और शिक्षकों को इस ‘असंवैधानिक कानून’ से मुक्ति दिलाई जाए।
शिक्षकों का कहना था कि देश के लगभग 25 लाख शिक्षकों पर इस प्रकार का कानून थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवता और नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षक दिल्ली और लखनऊ की सड़कों पर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
कार्यक्रम का संचालन भी जुलूस में शामिल शिक्षक नेताओं द्वारा किया गया।

