"जौनपुर ने जो सम्मान दिया, वह कहीं नहीं मिला" बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल

 चार वर्ष 10 माह बाद जौनपुर से विदा हुए बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल, शिक्षा जगत में छोड़ गए अमिट छाप

जौनपुर। जिले की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल का तबादला सीतापुर जनपद के लिए हो गया है। जुलाई 2021 में जौनपुर का कार्यभार संभालने वाले डॉ. पटेल ने अपने लगभग चार वर्ष 10 माह के कार्यकाल में न केवल बेसिक शिक्षा की नींव को मजबूत किया, बल्कि शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारकर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां भी हासिल कीं।

डॉ. गोरखनाथ पटेल का कार्यकाल जौनपुर के शिक्षा जगत में एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने कार्यालय की चारदीवारी से निकलकर सीधे गांवों और स्कूलों तक पहुंचकर व्यवस्था को समझा और सुधारने का प्रयास किया। छात्र संख्या बढ़ाने, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए उन्होंने लगातार फील्ड में सक्रिय भूमिका निभाई।

चिलचिलाती धूप में गांव-गांव पहुंचे बीएसए

जब सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने का अभियान चलाया गया, तब डॉ. पटेल ने केवल आदेश जारी करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में गांव-गांव जाकर अभिभावकों से संवाद किया, बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया और शिक्षकों को भी इस अभियान में पूरी ऊर्जा के साथ जुटने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके इसी जमीनी दृष्टिकोण का परिणाम रहा कि जिले के अनेक विद्यालयों में छात्र संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

"मैं अधिकारी नहीं, परिवार का सदस्य हूं"

डॉ. पटेल के कार्यभार ग्रहण करने के समय कही गई एक बात आज भी शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय है। उन्होंने पहले ही दिन कहा था, "मैं आपका अधिकारी नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य हूं। मेरे कार्यालय के दरवाजे आप सभी के लिए हमेशा खुले रहेंगे।"

शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में इस कथन को व्यवहार में भी साबित किया। विभागीय समस्याओं के समाधान से लेकर व्यक्तिगत कठिनाइयों तक, डॉ. पटेल हमेशा शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ खड़े दिखाई दिए। यही कारण है कि उनके तबादले की खबर से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों में भावुकता का माहौल है।

एक शिक्षक ने कहा, "डॉ. गोरखनाथ पटेल ने कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि वह हमारे अधिकारी हैं। उन्होंने हर समस्या को परिवार के सदस्य की तरह सुना और समाधान का प्रयास किया। ऐसे अधिकारी बहुत कम मिलते हैं।"

शिक्षा सुधारों की बनी मिसाल

अपने कार्यकाल के दौरान डॉ. पटेल ने विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने, आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने, मिशन प्रेरणा सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कराने और शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का कार्य किया। उनके नेतृत्व में जिले के कई विद्यालयों ने प्रदेश स्तर पर पहचान बनाई।

"जौनपुर ने जो सम्मान दिया, वह कहीं नहीं मिला"

तबादले के बाद शिराज-ए-हिंद डॉट कॉम से विशेष बातचीत में डॉ. गोरखनाथ पटेल भावुक नजर आए। उन्होंने कहा,

"मैं जुलाई 2021 में जौनपुर का बेसिक शिक्षा अधिकारी बनकर आया था। इस जनपद की धरती ने मुझे जो प्यार, सम्मान और सहयोग दिया, वह मुझे आज तक कहीं नहीं मिला। यहां के शिक्षकों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों का स्नेह मैं जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा।"

उन्होंने कहा कि जौनपुर में बिताए गए चार वर्ष 10 माह उनके प्रशासनिक जीवन के सबसे यादगार और संतोषजनक वर्षों में शामिल रहेंगे।

याद किया जाएगा यह कार्यकाल

जौनपुर में डॉ. गोरखनाथ पटेल का कार्यकाल केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग का ऐसा वातावरण तैयार किया, जिसकी मिसाल लंबे समय तक दी जाती रहेगी। उनके तबादले के साथ एक सफल अध्याय का समापन जरूर हुआ है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और सरल व्यक्तित्व की छाप जिले के लोगों के दिलों में लंबे समय तक बनी

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