सामाजिक समरसता से ही भारत बनेगा विश्वगुरु : गिरीश चंद्र यादव

 गोरक्षपीठ की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं समरसता सम्मान समारोह आयोजित

जौनपुर। राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं समरसता सम्मान समारोह का आयोजन कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे तथा समाज में सद्भाव और एकात्मता को मजबूत करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि गोरखपुर का गोरक्षपीठ केवल आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने सदैव सनातन धर्म के मूल्यों को आगे बढ़ाने के साथ समाज को जोड़ने का कार्य किया है।

विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह ‘प्रिंसू’ ने कहा कि गोरक्षपीठ ने हर दौर में समाज को एकजुट रखने और सनातन संस्कृति को मजबूत करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए संतों ने समय आने पर शास्त्र के साथ शस्त्र भी उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर विकास और समरसता का वातावरण तैयार किया है।

पूर्व सांसद एवं पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि सामाजिक समरसता भारतीय संस्कृति की आत्मा है। भगवान राम और भगवान कृष्ण ने भी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के बिना सनातन धर्म के उद्देश्यों की पूर्ति संभव नहीं है और इसी भावना से भारत विश्वगुरु बन सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामशीष ने कहा कि समाज में बढ़ती जातीय दूरियों को समाप्त करने के लिए सभी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि संतों ने सदैव समाज को जोड़ने का कार्य किया है, लेकिन आज समाज को तोड़ने की साजिशें भी बढ़ रही हैं। उन्होंने “एक-दूसरे में ईश्वर देखने” की संत परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता बताई।

गुरु रविदास जन्मस्थान वाराणसी के आचार्य भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि गोरक्षपीठ ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य अग्रिम पंक्ति में रहकर किया है। उन्होंने समाज और मन में मौजूद भेदभाव मिटाकर ‘तेरे-मेरे’ की भावना से ऊपर उठने का आह्वान किया।

बारीनाथ मठ के महंत योगी हरदेवनाथ जी महाराज ने कहा कि समरसता का वास्तविक अर्थ त्याग, प्रेम और अपनत्व है। समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाकर ही सच्ची सामाजिक एकता स्थापित की जा सकती है।

कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन द्वारा किया गया। संगोष्ठी के संयोजक एवं फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए सामाजिक समरसता को भारतीय संस्कृति की मूल भावना बताया। कार्यक्रम का संचालन श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने किया।

इस दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 22 लोगों को “समरसता सम्मान” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उपस्थित प्रमुख लोगों में पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. सूर्य प्रकाश सिंह, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. कुंवर शेखर, अमिताभ, विजय गुप्ता, धर्मेंद्र, पंकज त्रिपाठी, सुरेश सिंह, पवन कुमार एवं शिवकुमार चौबे शास्त्री सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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