हत्यारे सुनील शर्मा को मरते दम तक जेल की सलाखों के पीछे रहने का हुक्म
रिश्तों का कत्ल: पेड़ के मामूली विवाद में जो पट्टीदार बना था 'हैवान', कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाकर भेजा नरक के द्वार!
सनसनीखेज: रात के अंधेरे में गड़ासी और लाठी से कूच डाला था सगे पड़ोसी का चेहरा, रोती रह गई थी पत्नी।
समाज हित में: चंद इंच जमीन और पेड़ की खातिर खून बहाने वालों के मुंह पर कानून का करारा तमाचा, एक पल का गुस्सा दो परिवारों को निगल गया।
जौनपुर ।कहते हैं कि 'दीवारें छोटी होती हैं और दिल बड़े होने चाहिए', लेकिन आज के इस दौर में इंसानियत किस कदर दम तोड़ चुकी है, इसकी रोंगटे खड़े कर देने वाली मिसाल जौनपुर की अदालत में देखने को मिली। जिस पड़ोसी और पट्टीदार को सुख-दुख का साथी होना चाहिए था, उसने महज़ एक पेड़ के विवाद में हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। लेकिन कानून के हाथ से कोई पापी नहीं बच सकता। जिला जज सुशील कुमार शशि की अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड के दोषी पट्टीदार सुनील शर्मा को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सख्त सजा सुनाकर समाज को एक कड़ा और कड़वा सबक दिया है।
*चीखती रही पत्नी, लहूलुहान होकर तड़प उठा पति: वह काली रात
यह दिल दहला देने वाली वारदात महाराजगंज थाना क्षेत्र के उमरीकला गांव की है। मृतक जयप्रकाश शर्मा की पत्नी हीरावती देवी द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जनवरी 2024 की रात करीब 8:30 बजे, जब पूरा गांव कड़ाके की ठंड में सिमटा था, तब पड़ोस में रहने वाला पट्टीदार सुनील शर्मा पेड़ के विवाद को लेकर जयप्रकाश को गंदी-गंदी गालियां दे रहा था।
जब सीधे-साधे जयप्रकाश ने इस बदसलूकी का विरोध किया, तो सुनील के सिर पर खून सवार हो गया। वह पहले से ही हत्या की साजिश रचकर बैठा था। सुनील ने आव देखा न ताव, हाथ में ली हुई धारदार गड़ासी और भारी लाठी से जयप्रकाश पर काल बनकर टूट पड़ा।
हैवान बने सुनील ने जयप्रकाश के सिर और चेहरे पर गड़ासी व लाठी से वार किए जिससे जयप्रकाश का चेहरा खून से लथपथ हो गया। चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग दौड़ते, जयप्रकाश तड़पते हुए जमीन पर गिर चुका था। आनन-फानन में उन्हें बदलापुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। मामूली पेड़ के विवाद ने एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में उजाड़ दिया।
पुलिस की मुस्तैदी और कोर्ट का हथौड़ा: ऐसे सलाखों के पीछे पहुंचा कातिल
वारदात के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। महाराजगंज पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कातिल सुनील शर्मा को दबोच लिया। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ कर हत्यारे की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया ‘आलाकत्ल’ यानी खून से सनी गड़ासी और लाठी भी बरामद कर ली। पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अदालत में सरकार की तरफ से डीजीसी फौजदारी लाल बहादुर पाल, अतुल कुमार श्रीवास्तव और विनीत शुक्ला ने इस जघन्य अपराध के खिलाफ मजबूती से पैरवी की। गवाहों की गवाही और पुलिस के अकाट्य सबूतों के सामने बचाव पक्ष की एक न चली। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि सुनील शर्मा का यह कृत्य माफी के लायक नहीं है और उसे हत्या (धारा 302) का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी।
समाज हित में सोचिए: क्या पेड़ और जमीन की कीमत किसी की जान से बड़ी है?
यह घटना सिर्फ एक क्राइम बुलेटिन की खबर नहीं है, बल्कि हमारे समाज के गिरते मानसिक स्तर पर एक करारा तमाचा है।
लालच और अहंकार की बलि चढ़ते रिश्ते: आज ग्रामीण इलाकों में पेड़, नाली, खड़ंजे और चंद इंच जमीन के लिए सगे पट्टीदार एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं।
एक पल का गुस्सा, दो परिवार तबाह:
सुनील शर्मा के इस पागलपन ने दो हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया। एक तरफ पीड़ित परिवार ने अपना मुखिया खो दिया, तो दूसरी तरफ दोषी का परिवार भी समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहा और खुद दोषी अब पूरी जिंदगी जेल की चक्की पीसेगा।
अदालत का यह फैसला
उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो छोटी-मोटी रंजिशों में कानून को अपने हाथ में लेने की हिमाकत करते हैं। इंसाफ की जीत हुई है, लेकिन समाज के हर नागरिक को यह सोचना होगा कि आपसी सौहार्द और बातचीत से जो मसले हल हो सकते हैं, उन्हें गुस्से की आग में झोंककर जिंदगी को नरक न बनाएं।

