स्वतंत्रता सेनानी पं. भगौतीदीन तिवारी की स्मृति में बना भव्य द्वार, क्षेत्रवासियों में खुशी
पं. भगौतीदीन तिवारी का जीवन राष्ट्रसेवा, शिक्षा और समाजोत्थान को समर्पित रहा। उनकी स्मृतियों को सहेजने के लिए इससे पूर्व ग्राम अटरा (शंकरगढ़) के प्रवेश द्वार पर भी पूर्व प्रधान धनंजय तिवारी के प्रयासों से स्मृति द्वार का निर्माण कराया जा चुका है। वहीं, तेजी बाजार स्थित जय हिंद इंटर कॉलेज परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित है, जो आज भी नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और संघर्षों की याद दिलाती है।
ग्राम अटरा (शंकरगढ़) निवासी पं. भगौतीदीन तिवारी स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी सेनानियों में शामिल थे। वर्ष 1941 के कांग्रेस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें एक वर्ष के कठोर कारावास और 50 रुपये जुर्माने अथवा अतिरिक्त तीन माह के कारावास की सजा भुगतनी पड़ी थी। इसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 9 अगस्त 1942 से 13 सितंबर 1945 तक वे नजरबंद रहे और देश की आजादी के लिए संघर्षरत रहे।
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे और अपने जीवनकाल में दो दर्जन से अधिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। विधि विशेषज्ञ के रूप में कई रियासतों के कानूनी सलाहकार रहे तथा गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर भूदान आंदोलन समिति के अध्यक्ष पद पर रहते हुए समाज सेवा के अनेक कार्य किए।
स्मृति द्वार के निर्माण पर उनके प्रपौत्र डॉ. राजन तिवारी ने विधायक, सामाजिक संगठनों, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा तथा क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृतियों का संरक्षण हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे प्रयास युवा पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा और लोकसेवा के आदर्शों से प्रेरणा देते रहेंगे।

