शादी की शहनाई से लेकर जन्मदिन की पार्टी तक बहा खून, जमीन के टुकड़े ने ली जानें

जौनपुर। कभी अपनी गंगा-जमुनी तहजीब, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाला शिराज-ए-हिंद इन दिनों अपराध की भयावह खबरों से सुर्खियों में है। पिछले दो महीनों में जिले में हत्या, गोलीकांड, जानलेवा हमले, जमीन विवाद, महिलाओं के खिलाफ अपराध, चोरी और लूट की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे रहे कि कहीं बारात में दूल्हे को गोलियों से भून दिया गया तो कहीं जन्मदिन की पार्टी खूनी संघर्ष में बदल गई। जमीन और पुरानी रंजिशों ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए।

मई और जून 2026 के दौरान जिले में हुई वारदातों की पड़ताल करें तो सामने आता है कि कई हत्याएं और संदिग्ध मौतें, दर्जनों जानलेवा हमले और कई सनसनीखेज घटनाओं ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया।

एक मई को खेतासराय क्षेत्र में घटी घटना ने पूरे देश का ध्यान जौनपुर की ओर खींच लिया। बारात लेकर जा रहे दूल्हे आजाद बिंद को बाइक सवार हमलावरों ने गोलियों से छलनी कर दिया। बाद में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और मुख्य आरोपी रवि यादव मुठभेड़ में मारा गया।

10 जून को बक्शा के कौली गांव में जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। मारपीट में भाजपा नेता अजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। यह हत्या जिले की सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाओं में शामिल रही।

22 जून को बक्शा थाना क्षेत्र के मई गांव में जन्मदिन की पार्टी के दौरान हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। शराब पार्टी के बीच शुरू हुई कहासुनी इतनी बढ़ी कि 20 वर्षीय सुमित कुमार सिंह को बल्ली से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को उजागर कर दिया।

पिछले दो महीनों की अपराध डायरी का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकांश बड़ी घटनाओं की जड़ में जमीन विवाद रहा। सवंसा गांव में आशा कार्यकर्ता चेतना सिंह की मौत, धरौरा में रामदुलार सरोज की हत्या, कौली में भाजपा नेता की मौत, केवटली में हिंसक संघर्ष और कई अन्य वारदातों में जमीन विवाद ही खूनी टकराव का कारण बना।

17 जून को महराजगंज के सवंसा गांव में जमीन को लेकर हुए विवाद में आशा कार्यकर्ता चेतना सिंह की मौत हो गई। वहीं 15 जून को केराकत के धरौरा गांव में रास्ते के विवाद में रामदुलार सरोज की हत्या कर दी गई।

चार मई को जफराबाद के नाथूपुर गांव में मेहंदी समारोह के दौरान पुरानी रंजिश में एक व्यक्ति को गोली मार दी गई। 14 मई को अधिवक्ता अंबे प्रसाद पांडेय पर दिनदहाड़े लोहे की रॉड से हमला किया गया। बाद में पुलिस ने मामले के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

सरपतहां में रास्ता मांगने पर चाकू से हमला, चौकीदार पर धारदार हथियार से वार और एसडीएम कार्यालय के मुंशी पर हमला जैसी घटनाएं भी चर्चा में रहीं।

गौराबादशाहपुर, जफराबाद, सरपतहां और जलालपुर क्षेत्रों में महिलाओं और युवतियों से छेड़छाड़, मारपीट और हमले की घटनाएं सामने आईं। नावघाट पुल पर महिला से छेड़छाड़ और मंगलसूत्र लूट की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

सरायख्वाजा के पोटरिया गांव में 20 लाख रुपये से अधिक की चोरी, चौकियां में दो लाख रुपये की सेंधमारी, रामपुर में घर में घुसकर हमला और लूट तथा पूर्व सिपाही रामलखन यादव के घर लाखों की चोरी की घटनाएं भी सुर्खियों में रहीं।

18 जून को जफराबाद के शिवपुर गांव में करीब 200 वर्ष पुराने दुर्गा मंदिर की प्रतिमा खंडित कर गोमती किनारे फेंक दी गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

पिछले दो महीनों की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि जौनपुर में अपराध का स्वरूप पहले से अधिक हिंसक और संगठित होता जा रहा है। जमीन, रंजिश, दबंगई और व्यक्तिगत विवाद अब सीधे खून-खराबे में बदल रहे हैं। शिराज-ए-हिंद की पहचान को बचाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन के सामने अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।

बारात में दूल्हे की हत्या से लेकर जन्मदिन की पार्टी में युवक की मौत तक, बीते 60 दिनों की क्राइम डायरी जौनपुर के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि यदि समय रहते हालात नहीं संभले तो अपराध का यह ग्राफ और भयावह रूप ले सकता है।

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