हत्या-चोरी के खुलासे अधर में, रीलबाजों की धरपकड़ में व्यस्त कुंवर साहब की टीम!
दूल्हा हत्याकांड के नामजद आरोपी अब भी फरार, गांधी प्रतिमा चोरी का सुराग नहीं; ऑपरेशन वज्रपात में सोशल मीडिया गैंगों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
जौनपुर। जिले में एक ओर हत्या, चोरी और लूट जैसी गंभीर वारदातों के खुलासे का इंतजार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस का पूरा फोकस सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले युवकों और कथित गैंग संचालकों की धरपकड़ पर दिखाई दे रहा है। इसी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।हाल ही में चर्चित दूल्हा हत्याकांड में नामजद दो आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पीड़ित परिवार लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इसी तरह महाराजगंज क्षेत्र के गांधीनगर बाजार से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चोरी हुई प्रतिमा का भी अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। करीब एक माह बीतने के बाद भी पुलिस चोरी की इस संवेदनशील घटना का खुलासा करने में असफल रही है।
इन मामलों को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस नेताओं ने गांधी प्रतिमा बरामद न होने पर आंदोलन की चेतावनी तक दे रखी है।
इसी बीच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे "ऑपरेशन वज्रपात" के तहत गुरुवार को जिले के विभिन्न थानों की पुलिस ने सोशल मीडिया पर सक्रिय कथित गैंगों और रीलबाज युवकों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। सिकरारा, सुरेरी, तेजीबाजार, शाहगंज, गौराबादशाहपुर और बक्शा थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें एक युवक अवैध तमंचे के साथ पकड़ा गया, जबकि अन्य को शांति भंग की आशंका में न्यायालय भेजा गया।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर असलहों का प्रदर्शन, गैंग बनाकर दबंगई और भय का माहौल पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। वहीं जिले के एक वर्ग का मानना है कि पुलिस को अपनी ऊर्जा और संसाधनों का बड़ा हिस्सा हत्या, चोरी और अन्य संगीन अपराधों के खुलासे में लगाना चाहिए, ताकि आम जनता में सुरक्षा का भरोसा मजबूत हो सके।
जिले में चर्चा इस बात की भी है कि जिन मामलों से सीधे कानून-व्यवस्था और जनभावनाएं जुड़ी हैं, उनमें अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है, जबकि रीलबाजों के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुखता से प्रचारित किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं या फिर गंभीर अपराधों के लंबित मामलों पर भी उतनी ही तेजी से काम करने की आवश्यकता है।
फिलहाल जनता की निगाहें दूल्हा हत्याकांड के फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और गांधी प्रतिमा चोरी के खुलासे पर टिकी हुई हैं। इन मामलों में पुलिस की सफलता ही उसके अपराध नियंत्रण के दावों की असली कसौटी मानी जाएगी।

