पवित्र उद्देश्य की ही सहायता करता है परमात्मा : डॉ. मदन मोहन मिश्र
जौनपुर। शीतला चौकियां धाम में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रहे श्रीराम कथा महोत्सव के 27वें दिन वाराणसी से पधारे मानस कोविद डॉ. मदन मोहन मिश्र ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पवित्र उद्देश्य की सहायता करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और ईश्वर की कृपा उसी को प्राप्त होती है जिसका लक्ष्य लोककल्याण और धर्म के मार्ग पर आधारित होता है।
लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का वर्णन करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि कालनेमि ने तालाब, मंदिर और बाग का निर्माण कराया तथा स्वयं महात्मा का वेश धारण कर कथा भी करने लगा, लेकिन उसका उद्देश्य हनुमान जी की यात्रा में बाधा उत्पन्न करना था। इसी कारण हनुमान जी ने उसका वध कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी कार्य का मूल्य उसके बाहरी स्वरूप से नहीं, बल्कि उसके पीछे निहित भावना और उद्देश्य से निर्धारित होता है।
उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे श्रेष्ठ यात्रा वही है जो हनुमान जी जैसे महापुरुषों की गोद से होकर परमात्मा की शरण तक पहुंचाए। जिस प्रकार हनुमान जी संजीवनी लाने के क्रम में सुषेण वैद्य को सम्मानपूर्वक लेकर आए और सुरक्षित वापस पहुंचाया, उसी प्रकार व्यक्ति को भी अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. अखिलेश चन्द्र पाठक ने पुरुषोत्तम मास के महत्व पर सारगर्भित प्रवचन देते हुए कहा कि यह मास आत्मशुद्धि, भक्ति और लोकमंगल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। कार्यक्रम का संचालन गुड्डू उपाध्याय ने किया, जबकि अंत में शिवाश्रय गिरी ने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विश्व कल्याण के लिए जारी है मास पारायण मानस महायज्ञ
शीतला चौकियां धाम में पुरुषोत्तम मास के प्रथम दिन से मास पारायण मानस महायज्ञ का आयोजन निरंतर चल रहा है। पुरुषोत्तम मास के 28वें दिन शनिवार को तेरस तिथि के अवसर पर यज्ञाचार्य डॉ. अखिलेश चन्द्र पाठक के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने हवन-पूजन कर विश्व कल्याण की कामना की।
आयोजकों ने बताया कि हवन-पूजन का कार्यक्रम प्रतिदिन सायं 4 बजे से 6 बजे तक पुरुषोत्तम मास की समाप्ति तक चलता रहेगा। आयोजन समिति ने जनपदवासियों से सपरिवार हवन-पूजन में शामिल होकर विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं मानव कल्याण की प्रार्थना करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक अनुष्ठान समाज में सद्भाव, आध्यात्मिक जागृति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

